
घरों में किया जा रहा कीटनाशक का छिड़काव, स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीणों से सहयोग और सावधानी बरतने की अपील की
सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। जिले में मलेरिया की रोकथाम को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने संवेदनशील एवं उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में निगरानी और नियंत्रण गतिविधियां तेज कर दी हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग छत्तीसगढ़ के निर्देशानुसार चिन्हित गांवों में इंडोर रेजिडुअल स्प्रेइंग (आईआरएस) अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर पहुंचकर मच्छरों के प्रजनन एवं विश्राम स्थलों को लक्षित करते हुए निर्धारित मानकों के अनुसार कीटनाशक का छिड़काव कर रही हैं। कलेक्टर इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल के मार्गदर्शन में तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आशीष शर्मा और जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. विवेक बिसेन के नेतृत्व में यह अभियान माइक्रो-प्लान के अनुसार संचालित किया जा रहा है। अभियान का मुख्य उद्देश्य मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों की संख्या को नियंत्रित करना और मानव-मच्छर संपर्क को कम कर संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ना है। स्वास्थ्य विभाग की टीमों द्वारा घरों की आंतरिक दीवारों सहित मच्छरों के संभावित विश्राम स्थलों पर कीटनाशक का छिड़काव किया जा रहा है। इसके साथ ही ग्रामीणों को आईआरएस की उपयोगिता छिड़काव के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों तथा निर्धारित समय तक घर के भीतर प्रवेश नहीं करने संबंधी आवश्यक जानकारी भी दी जा रही है।

जांच से उपचार तक निगरानी
मलेरिया नियंत्रण के लिए केवल कीटनाशक छिड़काव तक अभियान सीमित नहीं है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा गांवों में बुखार सर्वेक्षण मलेरिया की जांच संक्रमित मरीजों का तत्काल उपचार और नियमित रूप से मच्छरदानी के उपयोग के लिए लोगों को प्रेरित किया जा रहा है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में मलेरिया से बचाव के उपायों को लेकर जागरूकता गतिविधियां भी संचालित की जा रही हैं।
छिड़काव में सहयोग करें, बुखार को नजरअंदाज न करें
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आशीष शर्मा ने जिलेवासियों से अपील की है कि स्वास्थ्य विभाग की टीम जब उनके घर में आईआरएस का छिड़काव करने पहुंचे तो उसका सहयोग करें। उन्होंने लोगों से रात में नियमित रूप से मच्छरदानी का इस्तेमाल करने और बुखार आने पर स्वयं दवा लेने के बजाय तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में मलेरिया की जांच कराने की अपील की है। जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. विवेक बिसेन ने बताया कि मलेरिया की रोकथाम के लिए समय पर जांच और उपचार के साथ मच्छरों पर प्रभावी नियंत्रण जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए जिले के उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में आईआरएस गतिविधियों को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे स्वास्थ्य विभाग के अभियान में सहभागी बनें और मलेरिया के संभावित लक्षणों को गंभीरता से लेते हुए समय पर जांच कराएं।

