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सेवा सेतु केंद्र की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, उच्चस्तरीय जांच की उठी मांग

सत्यमेव न्यूज छुईखदान। तहसील कार्यालय परिसर में संचालित सेवा सेतु केंद्र की कार्यप्रणाली को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठने लगे हैं। नागरिकों ने नाम परिवर्तन संबंधी प्रक्रिया और आधार कार्ड सेवाओं में कथित अतिरिक्त शुल्क वसूली की शिकायत करते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग प्रशासन से की है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि नाम परिवर्तन के लिए आवश्यक समाचार पत्र में इश्तिहार प्रकाशित कराने के नाम पर हितग्राहियों से राशि ली जा रही है। उनका कहना है कि समाचार पत्र में इश्तिहार प्रकाशित कराना सेवा सेतु केंद्र के निर्धारित दायरे का हिस्सा नहीं है इसके बावजूद इस प्रक्रिया में केंद्र की ओर से मध्यस्थता की जा रही है। इससे सेवा की पारदर्शिता और नियमों के पालन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिकांश हितग्राही सरकारी प्रक्रियाओं से अनभिज्ञ होते हैं। आरोप है कि उन्हें यह जानकारी नहीं दी जाती कि वे स्वयं भी किसी मान्यता प्राप्त समाचार पत्र में नियमानुसार इश्तिहार प्रकाशित करा सकते हैं। इसके बजाय सेवा सेतु केंद्र के माध्यम से ही प्रक्रिया पूरी कराने की बात कहकर राशि ली जाती है। शिकायतकर्ताओं ने यह भी दावा किया है कि कुछ मामलों में वास्तविक खर्च से अधिक राशि वसूले जाने की शिकायतें सामने आई हैं। उनका कहना है कि संबंधित हितग्राही जांच के दौरान अपने बयान और उपलब्ध दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने प्रत्येक प्रकरण में वसूले गए शुल्क अधिकृत दर और संबंधित अभिलेखों की जांच कराने की मांग की है। मामले में आधार कार्ड से संबंधित सेवाओं में भी निर्धारित शुल्क से अधिक राशि लिए जाने के आरोप लगाए गए हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि तहसील परिसर में संचालित नागरिक सेवाओं को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही हैं, तो संबंधित विभागों को समयबद्ध जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए। स्थानीय नागरिकों ने कलेक्टर एसडीएम एवं संबंधित विभाग से मांग की है कि यह स्पष्ट किया जाए कि क्या सेवा सेतु केंद्र को नाम परिवर्तन संबंधी इश्तिहार प्रकाशित कराने में मध्यस्थता का वैधानिक अधिकार प्राप्त है हितग्राहियों से किस मद में कितना अधिकृत शुल्क लिया जाना निर्धारित है तथा क्या सभी आवेदकों को प्रक्रिया और उपलब्ध विकल्पों की पूरी जानकारी दी जाती है।
नागरिकों का कहना है कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता नियमों के उल्लंघन या अतिरिक्त वसूली की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं यदि शिकायतें निराधार हैं तो प्रशासन को तथ्यात्मक जानकारी सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए ताकि लोगों में किसी प्रकार का भ्रम न रहे।

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