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मनरेगा अब अधिकार नहीं रहा, केंद्र सरकार की कृपा पर निर्भर योजना बन गया-जांगिड़

सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। दुनियां की सबसे बड़ी अधिनियमित रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को लेकर कांग्रेस ने केंद्र की मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस का कहना है कि ‘सुधार’ के नाम पर मनरेगा की संवैधानिक आत्मा को समाप्त कर इसे अधिकार आधारित कानून से घटाकर केंद्र-नियंत्रित और शर्तों पर आधारित योजना बना दिया गया है। शनिवार को आयोजित पत्रकारवार्ता में कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि मनरेगा को कमजोर करने की यह प्रक्रिया नहीं रोकी गई तो देशव्यापी आंदोलन छेड़ा जाएगा।

पत्रकार वार्ता में मुख्य वक्ता के रूप में कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव व छत्तीसगढ़ कांग्रेस के सह प्रभारी एवं मनरेगा बचाव संग्राम जिला केसीजी के प्रभारी विजय जांगिड़ ने कहा कि मनरेगा महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज, काम की गरिमा और विकेंद्रीकृत विकास की अवधारणा का प्रतीक रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय हर गांव में 100 दिन रोजगार देना कानूनी बाध्यता थी लेकिन भाजपा सरकार ने इस गारंटी को समाप्त कर दिया। अब यह सरकार तय करेगी कि किस गांव में कब और कितने दिन काम मिलेगा। यह गरीबों और मजदूरों के अधिकारों पर सीधा हमला है।

पूर्व रायपुर महापौर एवं कांग्रेस के मनरेगा बचाव संग्राम जिला समन्वयक प्रमोद दुबे ने भाजपा पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि पार्टी भगवान राम के नाम पर योजनाओं का नाम रखकर राजनीतिक लाभ उठाने में लगी है। उन्होंने कहा कि राम के नाम पर चंदा मांगना भाजपा के लिए आसान है लेकिन सच्चाई यह है कि कर्मचारियों को समय पर वेतन तक नहीं मिल पा रहा। योजनाएं केवल प्रचार तक सीमित रह गई हैं।

वार्ता में कांग्रेस नेता प्रमोद दुबे ने दावा किया कि भाजपा के वरिष्ठ नेता बृजमोहन अग्रवाल और विजय बघेल को भी अपनी ही सरकार को पत्र लिखकर जगाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय योजनाएं कागजों में नहीं बल्कि ज़मीन पर दिखाई देती थीं इसलिए ऐसी स्थिति कभी उत्पन्न नहीं हुई।

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि नए प्रावधानों के तहत मजदूर अब पूरे साल काम की मांग नहीं कर सकेंगे। फसल कटाई के मौसम में रोजगार रोका जा सकेगा और फंड समाप्त होने की स्थिति में मजदूरों को महीनों तक बेरोजगार रहना पड़ेगा। इससे गरीब परिवार यह तय ही नहीं कर पाएंगे कि वे कब काम करेंगे और कब भूखे रहेंगे।

कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार मजदूरी भुगतान का बोझ राज्यों पर डालकर मनरेगा को कमजोर कर रही है। जहाँ पहले मजदूरी का पूरा भुगतान केंद्र करता था वहीं अब 60:40 के नए फंडिंग फॉर्मूले के तहत राज्यों को 40 प्रतिशत राशि वहन करनी होगी। वक्ताओं ने कहा कि इससे भविष्य में कई राज्यों में मनरेगा के बंद होने की नौबत आ सकती है।

कांग्रेस ने दावा किया कि मोदी सरकार के पिछले 11 वर्षों में मनरेगा के तहत राष्ट्रीय औसत रोजगार केवल 38 दिन रहा है। किसी भी वर्ष 100 दिन रोजगार का लक्ष्य पूरा नहीं किया गया। छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में भाजपा सरकार बनने के बाद अघोषित रूप से मनरेगा कार्य बंद होने के आरोप भी लगाए गए। पत्रकार वार्ता के अंत में कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि मनरेगा को कमजोर करने की कोशिशें जारी रहीं तो इसे लेकर देशव्यापी आंदोलन तेज किया जाएगा। इस अवसर पर विशेष रूप से विधायक यशोदा वर्मा, जिला अध्यक्ष कोमल दास साहू, पूर्व विधायक गिरिवर जंघेल, वरिष्ठ नेता पं.मिहीर झा, रज्जाक खान, विनोद ताम्रकार, गुलाब चोपड़ा, राजेश लुनिया, विजय वर्मा, प्रदेश कांग्रेस प्रतिनिधि एवं वरिष्ठ नेता नीलांबर वर्मा, कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्षगण भीखम चंद छाजेड़, आकाशदीप सिंह, रामकुमार पटेल, भृगेश यादव, जिला महिला कांग्रेस अध्यक्ष आरती महोबिया, किसान कांग्रेस के जिला अध्यक्ष राजा देवराज किशोर दास, छुईखदान नपं अध्यक्ष प्रतिनिधि गिरीराज किशोर दास, गंडई नपं अध्यक्ष टाकेश्वर शाह खुसरो, युवा नेता जितेन्द्र सिंह गौर, सज्जाक खान, सुरेन्द्र सिंह सोलंकी, नदीम मेमन, यतेंद्र जीत सिंह, रिंकू महोबिया, संजू चंदेल, प्रमोद ठाकुर, मन्नू चंदेल, शैलेन्द्र तिवारी, मनीष कोचर, संदीप सिरमौर, सुरजीत सिंह ठाकुर, रिंकू गुप्ता, सुहैल खान, हिमाचल राजपूत, कोमल वर्मा, खेमेश्वरी वर्मा, लक्ष्मी सिरमौर, अनुभा चंद्राकर, बिरबल वर्मा सहित बड़ी संख्या में कांग्रेसी उपस्थित थे।

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