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एडवर्ड चिल्ड्रन पार्क भूमि विवाद की जांच के लिए सात सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित

सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। नगर के बहुचर्चित एडवर्ड चिल्ड्रन पार्क भूमि विवाद तथा कथित अवैध प्लाटिंग प्रकरण की विस्तृत जांच के लिए जिला प्रशासन ने सात सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। कलेक्टर इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल द्वारा 8 जून 2026 को जारी आदेश क्रमांक 3469/अ.कले./2026 के तहत समिति को खसरा नंबर 167, 169 एवं 170 तथा नजूल प्लॉट नंबर 114 और 115 से संबंधित सभी तथ्यों की जांच कर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासनिक आदेश के अनुसार उक्त भूमि को लेकर लगातार समाचार प्रकाशित हो रहे हैं और विभिन्न व्यक्तियों द्वारा शिकायतें भी दर्ज कराई गई हैं साथ ही आयुक्त स्तर से भी प्रकरण की वास्तविक स्थिति की जानकारी मांगी गई है। पूर्व में प्राप्त शिकायतों, नजूल शाखा के प्रतिवेदनों तथा कथित अवैध प्लाटिंग से संबंधित दस्तावेजों के परीक्षण के बाद जांच समिति का गठन किया गया है।
समिति की अध्यक्षता अपर कलेक्टर करेंगे। नजूल अधिकारी को सदस्य सचिव बनाया गया है। इसके अलावा एसडीएम खैरागढ़, एसडीएम गंडई-छुईखदान, नगर एवं ग्राम निवेश विभाग राजनांदगांव के उप संचालक, मुख्य नगर पालिका अधिकारी खैरागढ़, जिला पंजीयक तथा तहसीलदार खैरागढ़ को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। पहली बार राजस्व, नजूल, नगर एवं ग्राम निवेश, नगर पालिका तथा पंजीयन विभाग संयुक्त रूप से पूरे प्रकरण की जांच करेंगे। जांच के दौरान संबंधित भूमि की वास्तविक प्रकृति, एडवर्ड चिल्ड्रन पार्क की मूल स्थिति, राजस्व अभिलेखों और मेंटेनेंस खसरों में दर्ज विवरणों के बीच अंतर, भूमि के 22 हिस्सों में विभाजन की प्रक्रिया तथा नगर एवं ग्राम निवेश विभाग से आवश्यक अनुमति लिए जाने जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं की पड़ताल की जाएगी। इसके अतिरिक्त रजिस्ट्री, नामांतरण, भूमि उपयोग परिवर्तन तथा सार्वजनिक उपयोग की भूमि के निजी विक्रय से जुड़े पहलुओं की भी जांच होगी। प्रकरण में अब तक विभिन्न अभिलेखों में संबंधित भूमि को अलग-अलग स्वरूपों में दर्ज किए जाने के तथ्य सामने आए हैं। कहीं इसे एडवर्ड चिल्ड्रन पार्क, कहीं छोटे झाड़ का जंगल, कहीं घास भूमि तथा कहीं निजी स्वामित्व वाली भूमि के रूप में उल्लेखित किया गया है। ऐसे में जांच समिति नजूल अभिलेखों, मूल राजस्व रिकॉर्ड, रियासतकालीन दस्तावेजों, रजिस्ट्री एवं नामांतरण आदेशों, नगर एवं ग्राम निवेश विभाग के अभिलेखों तथा वर्तमान भूमि उपयोग की स्थिति का समग्र परीक्षण करेगी। उल्लेखनीय है कि नगर एवं ग्राम निवेश विभाग पूर्व में ही संबंधित क्षेत्र में कथित अवैध प्लाटिंग का उल्लेख कर चुका है। नजूल शाखा द्वारा नगर पालिका को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश भी दिए जा चुके हैं जबकि राजस्व विभाग की संयुक्त जांच रिपोर्ट भी सामने आ चुकी है। अब उच्चस्तरीय समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगामी प्रशासनिक एवं कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी। करीब 85 हजार वर्गफीट भूमि, उसके 22 हिस्सों में विभाजन, 40 करोड़ रुपये से अधिक के संभावित लेन-देन, वर्ष 1948 की निजी संपत्ति सूची तथा 1974 की रजिस्ट्री सहित अनेक महत्वपूर्ण पहलू अब एक ही जांच के दायरे में आ गए हैं। ऐसे में समिति की रिपोर्ट पर न केवल प्रशासन बल्कि पूरे क्षेत्र की निगाहें टिकी हुई हैं।

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