खैरागढ़ से राजनांदगांव तक बन रही स्टेट हाईवे का हाल बेहाल
बारिश के बाद से निर्माण कार्य ठप, न पानी का छिड़काव न तो हो रहा कोई काम
दुकानदार बोले- मास्क पर भी जम रही धूल की मोटी परत
खैरागढ़। राजनांदगांव से खैरागढ़ के बीच करीब 90 करोड़ रुपए की लागत से 30 किलोमीटर से अधिक लंबाई में चल रहे सड़क निर्माण की रफ्तार बारिश के बाद थम गई है। निर्माणाधीन सड़क पर नियमित पानी का छिड़काव नहीं होने से अब धूल लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। खासकर नगर के सोनेसरार के बाद से बढ़ईटोला तक स्थिति ज्यादा खराब है, जहां सड़क की एक साइड भी पूरी तरह तैयार नहीं हुई है। सड़क से गुजरने वाले वाहनों के साथ उड़ने वाली धूल दुकानों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और आसपास के घरों में पहुंच रही है। सुबह और रात के समय धूल इतनी ज्यादा उड़ने की बात आम नागरिक बता रहे हैं कि सड़क पर वाहन भी साफ दिखाई नहीं देते और कोहरे जैसी स्थिति नजर आती है। बता दे कि निर्माण में तकनीकी या अन्य कारणों से देरी हो सकती है लेकिन जब तक काम शुरू नहीं होता तब तक कम से कम नियमित पानी का छिड़काव कर धूल को नियंत्रित किया जाना चाहिए।*
ग्रामीण इलाकों के बुजुर्गों ने सड़क किनारे बैठना छोड़ा, घर और दुकानों का सामान हो रहा खराब
धूल की समस्या का असर सड़क किनारे रहने वाले लोगों और दुकानदारों पर पड़ने की बात सामने आ रही है। ग्रामीणों के अनुसार सड़क किनारे बैठकर अखबार पढ़ने या शाम को समय बिताने वाले बुजुर्ग अब धूल और सांस लेने में परेशानी के कारण वहां बैठने से बच रहे हैं। दुकानदारों का कहना है कि स्थिति ऐसी हो गई है कि दुकान में मास्क लगाकर बैठना पड़ रहा है और मास्क पर भी कुछ देर में धूल की मोटी परत जम जाती है। कपड़ा दुकानदारों की परेशानी और ज्यादा है क्योंकि बाहर रखे कपड़ों पर धूल जमने से सामान खराब होने की स्थिति बन रही है। ग्रामीणों ने सड़क निर्माण एजेंसी से पानी के नियमित छिड़काव और निर्माण कार्य में तेजी लाने की मांग की है।
सड़क का निर्माण होते ही डामर उखड़ने पर भी उठ रहे सवाल
निर्माणाधीन सड़क के कुछ हिस्सों में शुरुआती चरण में किए गए डामरीकरण के उखड़ने की शिकायत भी ग्रामीणों द्वारा की जा रही है। लोगों का कहना है कि सड़क पर अलग-अलग लेयर में डामरीकरण किए जाने की बात कही जा रही है लेकिन शुरुआती दौर का ही डामर उखड़ने लगे तो निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। ग्रामीणों ने निर्माण की गुणवत्ता, उपयोग हो रही सामग्री और तकनीकी निगरानी की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि सड़क निर्माण का टेंडर राजनांदगांव जिले से संबंधित है जबकि बढ़ईटोला क्षेत्र खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले में आता है, ऐसे में स्थानीय स्तर पर निर्माण कार्य की निगरानी कौन कर रहा है इसे लेकर भी स्पष्टता जरूरी है। हालांकि गुणवत्ता संबंधी आरोपों की पुष्टि संबंधित विभाग की तकनीकी जांच के बाद ही हो सकेगी।
सुधार नहीं हुआ तो चक्काजाम की चेतावनी
सड़क की धूल और निर्माण कार्य में देरी को लेकर ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर कार्यालय में ज्ञापन सौंपकर समस्या के समाधान की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि दो दिनों के भीतर सड़क पर पानी का नियमित छिड़काव शुरू नहीं हुआ और निर्माण कार्य को लेकर उचित व्यवस्था नहीं की गई तो वे विभाग का घेराव या चक्काजाम करने के लिए मजबूर होंगे। ग्रामीणों ने कहा कि सड़क का निर्माण भले चरणबद्ध तरीके से हो लेकिन धूल नियंत्रण के लिए तत्काल व्यवस्था जरूरी है। ग्रामीणों ने धूल से खराब हो रहे व्यापारिक सामान के नुकसान का भी मुद्दा उठाते हुए उचित समाधान की मांग की है।

