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सिरपुर महोत्सव में खैरागढ़ विश्वविद्यालय के कलाकारों ने छोड़ी अमिट सांस्कृतिक छाप

सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। महासमुंद जिले के ऐतिहासिक सिरपुर में आयोजित सिरपुर महोत्सव के शुभारंभ दिवस पर इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ की प्रस्तुतियों ने मंच को कला और संस्कृति से सराबोर कर दिया। विश्वविद्यालय के कलाकारों को पहले दिन ही प्रमुख मंच प्रदान किया गया जहाँ शास्त्रीय और लोक कलाओं का प्रभावी संगम देखने को मिला। कार्यक्रम की शुरुआत कुलपति प्रो.डॉ. लवली शर्मा के सितार वादन से हुई। उन्होंने शुद्ध सारंग राग की भावपूर्ण प्रस्तुति देकर श्रोताओं को भारतीय शास्त्रीय संगीत की गहराई से परिचित कराया। उनकी वादन शैली में राग की कोमलता और भाव संवेदना स्पष्ट झलक रही थी। छत्तीसगढ़ को भगवान श्रीराम का ननिहाल बताते हुए उन्होंने रघुपति राघव राजा राम भजन की प्रस्तुति के साथ अपनी प्रस्तुति को भावात्मक विराम दिया। तबले पर अवध सिंह ठाकुर ने सशक्त संगत कर कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया। इसके पश्चात लोक संगीत विभाग के विद्यार्थियों ने छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं को मंच पर सजीव कर दिया। बारहमासी गीत के माध्यम से प्रस्तुत सुआ गेड़ी कलशा और बैगा नृत्य ने दर्शकों को तालियों की गूंज में बांधे रखा। पारंपरिक वेशभूषा सधे हुए कदम और लोकताल की जीवंत लय ने कार्यक्रम को खास पहचान दी। सिरपुर महोत्सव के पहले दिन खैरागढ़ विश्वविद्यालय की प्रस्तुतियों ने यह साबित किया कि शास्त्रीय अनुशासन और लोक संवेदना जब एक साथ मंच पर उतरते हैं तो संस्कृति अपने सबसे सुंदर रूप में सामने आती है। विश्वविद्यालय की यह सांस्कृतिक सहभागिता महोत्सव की प्रमुख आकर्षणों में शामिल रही।

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