
पुलिस की मानवीय एवं सार्थक पहल का दिखा असर
सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। जिला खैरागढ़-छुईखदान-गंडई के ग्राम मुतेड़ा (नवागांव) में सामाजिक बहिष्कार (हुक्का-पानी बंद) और मानसिक प्रताड़ना से जुड़ा गंभीर मामला पुलिस प्रशासन की संवेदनशील पहल से शांतिपूर्ण ढंग से सुलझ गया। पुलिस अधीक्षक लक्ष्य विनोद शर्मा के निर्देश पर डीएसपी ममता अली शर्मा ने तत्परता दिखाते हुए दोनों पक्षों को खैरागढ़ थाना बुलाकर विस्तार से सुनवाई की और सार्थक समझाइश के बाद आपसी सहमति से समझौता कराया। जानकारी के अनुसार ग्राम मुतेड़ा निवासी दीपक कुमार वर्मा ने पुलिस अधीक्षक को आवेदन देकर आरोप लगाया था कि गांव के कुछ लोगों द्वारा उनके पूरे परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया है। बहिष्कार के चलते न केवल सामाजिक व धार्मिक आयोजनों से उन्हें वंचित किया गया बल्कि रोजमर्रा की आवश्यकताओं, कृषि कार्य, मजदूर, ट्रैक्टर-हार्वेस्टर, सिंचाई व्यवस्था और यहां तक कि किराना व अन्य दुकानों से सामान लेने तक पर रोक लगा दी गई थी। इससे परिवार को गंभीर मानसिक व आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया कि गांव में आयोजित बैठक में धार्मिक सेवा के नाम पर उनसे दंड स्वरूप 2 लाख 10 हजार रुपये की मांग की गई थी जिसे अस्वीकार करने पर सामाजिक बहिष्कार लागू कर दिया गया। मामला बीते लगभग 9 माह से चला आ रहा था और स्थिति तनावपूर्ण होती जा रही थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर डीएसपी ममता अली शर्मा ने दोनों पक्षों को थाने में आमने-सामने बैठाकर कानून, सामाजिक सौहार्द और संवैधानिक अधिकारों की जानकारी दी। पुलिस की सख्त लेकिन मानवीय समझाइश का असर यह रहा कि गांव के मुखिया, ग्रामीण प्रतिनिधि और पीड़ित पक्ष एक राय पर पहुंचे। समझौते के तहत यह सहमति बनी कि किसी भी व्यक्ति या परिवार के साथ सामाजिक बहिष्कार जैसा असंवैधानिक कृत्य नहीं किया जाएगा सभी नागरिकों को समान रूप से सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक गतिविधियों में भाग लेने का अधिकार होगा तथा भविष्य में आपसी विवादों को बातचीत के माध्यम से सुलझाया जाएगा। समझौते के बाद दोनों पक्षों ने पूर्व की भांति शांतिपूर्ण, सौहार्दपूर्ण और सहयोगात्मक जीवन व्यतीत करने की प्रतिबद्धता जताई। इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस प्रशासन की भूमिका की स्थानीय स्तर पर सराहना की जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि ऐसे मामलों में समय रहते संवेदनशील हस्तक्षेप किया जाए तो सामाजिक तनाव को बढ़ने से रोका जा सकता है। पुलिस की यह कार्रवाई न केवल पीड़ित परिवार के लिए राहतकारी साबित हुई बल्कि गांव में पुनः आपसी विश्वास और सामाजिक समरसता बहाल करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।