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पूर्व कैबिनेट मंत्री कवासी लखमा अंततः जेल से रिहा, लेकिन छत्तीसगढ़ से होना होगा निर्वासित

सत्यमेव न्यूज़ (रायपुर)। छत्तीसगढ़ के पूर्व आबकारी मंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कवासी लखमा को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिलने के बाद बुधवार को रायपुर सेंट्रल जेल से रिहा कर दिया गया। रिहाई के बाद जेल परिसर के बाहर समर्थकों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान उनकी पत्नी कवासी बुदरी, विधायक विक्रम मंडावी, सावित्री मंडावी सहित बस्तर संभाग के कोंटा क्षेत्र से बड़ी संख्या में समर्थक मौजूद रहे। जेल से बाहर निकलते ही कवासी लखमा ने समर्थकों का हाथ जोड़कर अभिवादन किया और अपनी रिहाई को सत्य की जीत बताया। उन्होंने कहा कि करीब एक वर्ष 20 दिन बाद उन्हें जेल से बाहर आने का अवसर मिला है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के प्रति आभार जताते हुए न्याय व्यवस्था पर विश्वास व्यक्त किया। शर्तों के साथ मिली जमानत सुप्रीम कोर्ट ने शराब घोटाले से जुड़े ईडी और ईओडब्ल्यू के मामलों में कवासी लखमा को अंतरिम जमानत प्रदान की है। कोर्ट ने जमानत देते समय कुछ शर्तें भी निर्धारित की हैं। आदेश के अनुसार उन्हें छत्तीसगढ़ राज्य से बाहर रहना होगा तथा केवल न्यायालय में पेशी के दौरान ही राज्य में प्रवेश की अनुमति होगी। इसके अलावा उन्हें अपना पासपोर्ट जमा करना होगा और संबंधित पुलिस थाने में निवास का पता व मोबाइल नंबर दर्ज कराना अनिवार्य रहेगा। शराब घोटाले में लगे थे गंभीर आरोप कवासी लखमा को प्रवर्तन निदेशालय ने 15 जनवरी 2025 को कथित शराब घोटाले के मामले में गिरफ्तार किया था। उन पर लगभग 70 करोड़ रुपए के घोटाले में कमीशन लेने का आरोप लगाया गया था। गिरफ्तारी के बाद ईडी ने पूछताछ के लिए उन्हें सात दिन की कस्टडी में रखा था। इसके बाद 21 जनवरी से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। वह कुल 379 दिनों तक रायपुर सेंट्रल जेल में बंद रहे। लंबे समय से सक्रिय राजनीति में भूमिका कवासी लखमा वर्ष 1998 से लगातार छह बार कोंटा विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित होते रहे हैं। वे प्रदेश में कांग्रेस सरकार के दौरान मंत्री पद की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। उनकी रिहाई के बाद समर्थकों में उत्साह का माहौल देखा गया।

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