सदियों पुरानी परंपरा में आज भी जीवंत है छुईखदान का तीज पर्व, मनाया गया उत्सव

छुईखदान। शहीद नगरी छुईखदान के वार्ड क्रमांक-3 स्थित जमातपारा का जगन्नाथ मंदिर हरितालिका तीज पर्व पर आस्था और परंपरा का प्रमुख केंद्र बन जाता है। यहां तीज मनाने और भगवान जगन्नाथ की पूजा-अर्चना करने के लिए आसपास के गांवों और दूर-दराज के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में माताएं और बहनें पहुंचती हैं। बताया जाता है कि मंदिर परिसर में तीज पर्व मनाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है जिसे आज भी श्रद्धा और विश्वास के साथ निभाया जा रहा है।हिंदू वैदिक एवं सनातन परंपरा में हरितालिका तीज को सुहागिन महिलाओं के प्रमुख व्रतों में माना जाता है। हरितालिका तीज पर महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर अखंड सौभाग्य, पति की दीर्घायु तथा परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।

तीज के अवसर पर छुईखदान में पूरी आस्था व श्रद्धा के साथ महिलाएं प्रात: स्नान आदि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लेती हैं। कई महिलाएं दिनभर निर्जला व्रत रखकर शाम को या निर्धारित पूजा मुहूर्त में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करती हैं। पूजा में बेलपत्र, फूल, फल, अक्षत, धूप-दीप सहित विभिन्न पूजन सामग्रियों का उपयोग किया जाता है। महिलाएं तीज की कथा सुनती हैं और माता पार्वती से अपने दांपत्य जीवन की खुशहाली की प्रार्थना करती हैं।

जगन्नाथ मंदिर में जुटता है श्रद्धालुओं का कारवां

जमातपारा स्थित जगन्नाथ मंदिर में तीज पर्व का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। स्थानीय महिलाओं के साथ आसपास के क्षेत्रों से भी माताएं-बहनें यहां पहुंचती हैं। मंदिर परिसर में दिनभर धार्मिक माहौल बना रहता है। महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सज-संवरकर पूजा में शामिल होती हैं और एक-दूसरे को तीज पर्व की शुभकामनाएं देती हैं।*

स्थानीय लोगों के अनुसार जगन्नाथ मंदिर में तीज मनाने की परंपरा केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा भी है। पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही इस परंपरा में आज भी बड़ी संख्या में महिलाएं सहभागी बनती हैं। बुजुर्ग महिलाएं जहां तीज की धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं को नई पीढ़ी से साझा करती हैं वहीं युवा महिलाएं भी पूरे उत्साह के साथ पर्व में शामिल होकर अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ रही हैं।

हरितालिका तीज महिलाओं के लिए धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक मेल-मिलाप का भी पर्व है। इस दिन महिलाएं सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना करती हैं, तीज की कथा सुनती हैं और पारंपरिक रीति-रिवाजों का निर्वहन करती हैं। छुईखदान के जगन्नाथ मंदिर में वर्षों से चली आ रही यह परंपरा क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करती नजर आती है।

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