
55 वर्षों तक जगाया शिक्षा और संस्कार का अलख
विद्यालय में दी गई सामूहिक श्रद्धांजलि
विद्यार्थियों ने दी सलामी, शांति पाठ के बाद निकली अंतिम यात्रा
लालपुर मुक्तिधाम में हुआ अंतिम संस्कार
सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। प्रेम कुमार सरस्वती शिशु मंदिर की लंबे समय तक प्रधानाचार्य रहीं और विद्यार्थियों के बीच स्नेहपूर्वक ‘राज दीदी’ के नाम से लोकप्रिय सुश्री राजलक्ष्मी सिंह के निधन से खैरागढ़ में शोक की लहर है। सोमवार को अंतिम संस्कार से पूर्व उनका पार्थिव देह उसी विद्यालय परिसर में लाया गया जहां उन्होंने अपने जीवन के करीब 55 वर्ष विद्यार्थियों को शिक्षा, संस्कार और अनुशासन देने में समर्पित किए। विद्यालय पहुंचते ही शिक्षक, समिति सदस्य और विद्यार्थी भावुक हो उठे। विद्यार्थियों ने पुष्पांजलि अर्पित कर अपनी प्रिय ‘राज दीदी’ को सलामी दी। इसके बाद सामूहिक शांति पाठ किया गया। विद्यालय परिवार के लिए यह क्षण बेहद भावुक रहा क्योंकि जिस संस्था को राजलक्ष्मी सिंह ने अपना जीवन समर्पित किया वहीं से उनकी अंतिम यात्रा की शुरुआत हुई। श्रद्धांजलि के बाद अंतिम यात्रा लालपुर मुक्तिधाम के लिए रवाना हुई जहाँ शिक्षा जगत, सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों, उनके पूर्व विद्यार्थियों और बड़ी संख्या में नगरवासियों ने शामिल होकर उन्हें अंतिम विदाई दी। लालपुर के मुक्तिधाम में उनका अंतिम संस्कार किया गया। मुखाग्नि उनके भतीजे, सांसद प्रतिनिधि, जिला स्काउट गाइड के जिला मुख्य आयुक्त एवं समाजसेवी भागवत शरण सिंह ने दी।
तीन पीढ़ियों को दी आदर्शवादी शिक्षा
राजलक्ष्मी सिंह ने करीब पांच दशकों से अधिक समय तक विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके पढ़ाए विद्यार्थी आज न्याय-पालिका, चिकित्सा, पुलिस, प्रशासन, पत्रकारिता और शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में सेवाएं दे रहे हैं।
आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों का सहारा थी दीदी
आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों की फीस में सहयोग करने के साथ उन्होंने विद्यालय के अतिरिक्त कक्ष निर्माण के लिए भी अपने वेतन का योगदान दिया था। शिक्षा और संस्कार के क्षेत्र में उनके योगदान को याद करते हुए नगरवासियों ने कहा कि राजलक्ष्मी सिंह का निधन केवल एक शिक्षिका की विदाई नहीं बल्कि एक ऐसी मार्गदर्शक शख्सियत का जाना है जिसने कई पीढ़ियों के जीवन को दिशा दी। ‘राज दीदी’ अब भले ही हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनके दिए संस्कार, उनके विद्यार्थी और उनकी स्मृतियां लंबे समय तक जीवित रहेंगी।
