वायलिन की कर्णप्रिय प्रस्तुति से गूंजा खैरागढ़ विश्वविद्यालय, विद्यार्थियों से भी रूबरू हुये मशहूर वायलिन वादक पं.घोष

यूएसए अमेरिका से पधारे पं.इंद्रदीप घोष ने छात्रों को सिखाया वायलिन वादन का हुनर
सत्यमेव न्यूज/खैरागढ़. इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ के तन्त्री विभाग द्वारा 22 फरवरी को वायलिन प्रस्तुति का विशेष कार्यक्रम आयोजित हुआ. कार्यक्रम में प्रख्यात वायलिन वादक पं.इंद्रदीप घोष (यूएसए) ने वायलिन वादन की शानदार व कर्णप्रिय प्रस्तुति दी इस दौरान अवनद्य विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ.हरि ओम हरि ने अपनी ख्याति के अनुरूप तबले पर शानदार संगत कर शमां बांधने का काम किया. इस दौरान कार्यक्रम का अभिनंदन व आनंद लेने उपस्थिति रही कुलपति पद्मश्री डॉ.ममता (मोक्षदा) चंद्राकर ने उक्त संगीतमय कार्यक्रम की सराहना की. इस अवसर पर विश्वविद्यालय कार्य समिति की सदस्य सुविख्यात लोक गायिका कविता वासनिक, छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध लोक गायक डॉ.दिलीप षड़ंगी, विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त अधिष्ठाता व वायलिन गुरु प्रो.डॉ.हिमांशु विश्वरूप, संगीत संकाय के अधिष्ठाता प्रो.डॉ.नमन दत्त समेत विश्वविद्यालय के विद्यार्थी, शोधार्थी इस संगीतमय सुंदर प्रस्तुति के साक्षी बने.
विद्यार्थी व शोधार्थियों को मिली तंत्री वाद्य की सैद्धांतिक जानकारी
प्रथम सत्र में विषय विशेषज्ञ पं.इंद्रदीप घोष (यूएसए) के द्वारा विद्यार्थियों को तंत्री वाद्य से संबंधित सैद्धांतिक जानकारी दी गई. पंडित घोष ने विद्यार्थियों के जिज्ञासाओं का समाधान भी किया. संध्याकालीन प्रायोगिक सत्र में पं.घोष के वायलिन वादन की प्रस्तुति हुई. विश्वविद्यालय के विद्यार्थी और शोधार्थियों को उक्त साक्षात प्रस्तुति से बहुत कुछ देखने सीखने मिला. कार्यक्रम के संयोजक श्री विवेक नवरे ने बताया कि कुलपति डॉ.चंद्राकर के संरक्षण तथा कुलसचिव प्रो.डॉ.नीता गहरवार के मार्गदर्शन में यह कार्यक्रम संपन्न हुआ. कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के अधिष्ठातागण डॉ.योगेंद्र चौबे, डॉ.प्रो.राजन यादव, लोकपाल प्रो.डॉ.काशीनाथ तिवारी, सहायक कुलसचिव राजेश गुप्ता, असिस्टेंट प्रोफ़ेसर डॉ.लिकेश्वर वर्मा, डॉ.दिवाकर कश्यप, डॉ.जगदेव नेताम, डॉ.शिव नारायण मोरे, डॉ.मानस साहू, डॉ.शिवाली सिंह बैस, डॉ.आशुतोष चौरे, जनसंपर्क अधिकारी विनोद डोंगरे, विद्यार्थी-शोधार्थी, शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी समेत विश्वविद्यालय परिवार के सदस्य शामिल हुये.