
परियोजना को स्थायी रूप से निरस्त करने की मांग
दनिया-अतरिया-उदयपुर-हनईबन क्षेत्र की जमीन, जल और पर्यावरण बचाने संघर्ष जारी
किसान अधिकार संघर्ष समिति ने सौंपा प्रशासन को ज्ञापन
सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। केसीजी जिले के दनिया-अतरिया-उदयपुर-हनईबन संपूर्ण परिक्षेत्र में प्रस्तावित लाइमस्टोन खनन एवं सीमेंट फैक्ट्री स्थापना परियोजना के खिलाफ किसानों और ग्रामीणों का विरोध लगातार तीव्र होता जा रहा है। कृषि भूमि, जल स्रोत, पर्यावरण और ग्रामीण जीवन पर संभावित गंभीर दुष्प्रभावों को देखते हुए किसानों ने इस परियोजना को हमेशा के लिए निरस्त किए जाने की पुरजोर मांग की है। इस संबंध में किसान अधिकार संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल ने अनुभागीय अधिकारी (राजस्व) गंडई-छुईखदान को ज्ञापन सौंपकर अपनी आपत्तियों से प्रशासन को अवगत कराया। ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि प्रस्तावित लाइमस्टोन खनन एवं सीमेंट फैक्ट्री परियोजना से क्षेत्र की उपजाऊ कृषि भूमि नष्ट होगी भूमिगत एवं सतही जल स्रोत प्रभावित होंगे तथा पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ने के साथ ग्रामीणों की आजीविका पर सीधा खतरा उत्पन्न होगा। किसानों ने प्रशासन को अवगत कराया कि 02 जनवरी 2026 के संदर्भ में पूर्व में दी गई जानकारी के अनुसार शंडी लाइमस्टोन ब्लॉक की 11 दिसंबर 2025 को प्रस्तावित जनसुनवाई को पत्र क्रमांक 445/ख.नि./02/2025 दिनांक 09/12/2025 के माध्यम से स्थगित कर दिया गया है वहीं हनईबन लाइमस्टोन ब्लॉक की नीलामी प्रक्रिया को छत्तीसगढ़ शासन के खनिज साधन विभाग द्वारा टेंडर क्लॉज 8.1(A) एवं मिनरल नीलामी नियम 2015 के प्रावधानों के अंतर्गत दिनांक 09 दिसंबर 2025 को निरस्त किया जा चुका है। किसान अधिकार संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि इन निर्णयों के बावजूद क्षेत्र में भविष्य में पुनः किसी भी प्रकार की खनन गतिविधि की आशंका बनी हुई है। इसी कारण समिति की ओर से यह सामूहिक मांग की जा रही है कि दनिया-अतरिया-उदयपुर-हनईबन संपूर्ण परिक्षेत्र में प्रस्तावित लाइमस्टोन खनन एवं सीमेंट फैक्ट्री परियोजना को स्थायी रूप से बंद-रद्द किया जाए तथा इस संबंध में राज्य शासन रायपुर को भी प्रस्ताव भेजा जाए।
जानिए क्या है पीड़ित किसानों की प्रमुख मांग
संपूर्ण परिक्षेत्र में किसी भी लाइमस्टोन ब्लॉक को भविष्य में पुनः नीलामी के लिये न लाया जाए। हनईबन लाइमस्टोन ब्लॉक के लिए दोबारा कोई टेंडर जारी न किया जाए। संडी लाइमस्टोन ब्लॉक के लिए भविष्य में किसी भी प्रकार की नई जनसुनवाई तिथि घोषित न की जाए। ग्रामीणों की चेतावनी ग्रामीणों ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि वे अपनी जमीन, जल, पर्यावरण और आजीविका की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और आवश्यकता पड़ने पर शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से अपना संघर्ष लगातार जारी रखेंगे।
