
कन्या शाला की 500 से अधिक छात्राओं से संवाद, आत्मविश्वास, स्वास्थ्य और स्वावलंबन को सफलता की कुंजी बताया
सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। चुनौतियों से घबराने के बजाय उनका सामना करते हुए अपने लक्ष्य की ओर निरंतर आगे बढ़ने का संदेश लेकर पर्वतारोही एवं सोलो साइकलिस्ट समीरा खान खैरागढ़ पहुंचीं। 37 देशों और देश के दर्जनों राज्यों में 8 हजार किलोमीटर से अधिक की साइकिल यात्रा कर चुकी समीरा खान ने स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी एवं हिंदी माध्यम शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक शाला खैरागढ़ में 500 से अधिक छात्राओं से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने बालिकाओं को जीवन में आने वाली सामाजिक और पारिवारिक चुनौतियों का समाधान खोजते हुए आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया। छात्राओं को संबोधित करते हुए समीरा खान ने कहा कि बेटियों के सामने आज भी कई तरह की सामाजिक बाधाएं मौजूद हैं। लैंगिक भेदभाव के कारण उन्हें कई बार समान अवसर और स्वतंत्रता नहीं मिल पाती। परिवार और समाज की रूढ़ियां दहेज प्रथा मानसिक उत्पीड़न तथा यौन शोषण जैसी समस्याएं उनके विकास में बाधा बनती हैं। ऐसे में बेटियों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने के साथ ही चुनौतियों का डटकर सामना करने का साहस भी विकसित करना होगा। उन्होंने कहा कि मजबूत व्यक्तित्व के लिए केवल शिक्षा ही पर्याप्त नहीं है बल्कि शारीरिक और मानसिक मजबूती भी जरूरी है। छात्राओं को नियमित योग खेलकूद और व्यायाम के साथ पौष्टिक भोजन तथा पर्याप्त नींद पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने आत्मविश्वास को सफलता की पहली सीढ़ी बताते हुए कहा कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन हों अपने लक्ष्य को लेकर दृढ़ संकल्प और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए। सामाजिक कुरीतियों को चुनौती देकर आत्मनिर्भर बनना ही सशक्तिकरण का वास्तविक रास्ता है।
‘बेटियां कमजोर नहीं, उन्हें कमजोर बनाने वाली परिस्थितियां हैं
प्राचार्य डॉ कमलेश्वर सिंह ने समीरा खान के प्रेरणादायी संबोधन के लिए आभार जताते हुए कहा कि बेटियां किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कमतर नहीं हैं। उन्हें कमजोर बनाने वाली सामाजिक कुप्रथाओं और भेदभावपूर्ण परिस्थितियों को बदलने की आवश्यकता है। उन्होंने छात्राओं से स्वयं जागरूक होने आगे बढ़ने और अपनी पहचान बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बेटियों को शारीरिक मानसिक और आर्थिक रूप से मजबूत बनाना होगा तभी वे समाज में अपनी भूमिका प्रभावी ढंग से निभा सकेंगी। समाज को बेटियों के कदम रोकने के बजाय उनके रचनात्मक प्रयासों को प्रोत्साहित करना चाहिए। कार्यक्रम में शाला परिवार के कुणाल टंडन, अखिलेश कुमार श्रीवास्तव, विनीता दीक्षित, खूम वर्मा, उत्तरा साहू, करन साहू, रिया जैन, अनुपमा त्रिपाठी, तृप्ति दशरिया, मेघा उपाध्याय, सत्य प्रकाश, निलय दास, अमीषा देवांगन, प्रांजल सिन्हा, मनोज पटेल, प्रज्ञा सहित अन्य शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे।