बाजार अतरिया क्षेत्र में अवैध ईंट भट्टों का खेल जारी, प्रशासन मौन

सत्यमेव न्यूज बाजार अतरिया। केसीजी जिले के अंतिम छोर पर बसे बाजार अतरिया क्षेत्र में इन दिनों अवैध ईंट भट्टों का संचालन चर्चा और विवाद का विषय बना हुआ है। क्षेत्र के ग्राम बाजार अतरिया, सोनपुरी, आमाघाट कादा चौक सहित आसपास के कई गांवों में दर्जनों ईंट भट्टों के संचालित होने की जानकारी सामने आ रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई भट्टा संचालक बिना वैध अनुमति के नियमों को दरकिनार कर खुलेआम कारोबार चला रहे हैं लेकिन जिम्मेदार विभाग कार्रवाई करने के बजाय मूकदर्शक बने हुए हैं। ग्रामीणों के अनुसार कई ईंट भट्टे खेती योग्य भूमि और आबादी क्षेत्र के बेहद करीब संचालित हो रहे हैं। भट्टों से निकलने वाला जहरीला धुआं गांव तक पहुंच रहा है जिससे लोगों में श्वास एवं आंखों से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है। दूसरी ओर खेतों की उपजाऊ मिट्टी का बड़े पैमाने पर हनन कर ईंट निर्माण किया जा रहा है जिससे किसानों की कृषि भूमि बंजर होने की स्थिति में पहुंच रही है। कई स्थानों पर बिना रॉयल्टी और आवश्यक अनुमति के मिट्टी खनन किए जाने की शिकायतें भी लगातार सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ईंट भट्टों के संचालन के लिए पर्यावरण विभाग, खनिज विभाग और राजस्व विभाग से अनुमति आवश्यक होती है लेकिन क्षेत्र में कई भट्टे बिना वैध दस्तावेजों के संचालित हो रहे हैं। इसके बावजूद संबंधित विभागों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। इससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विभागीय मिलीभगत के बिना इतने बड़े स्तर पर अवैध संचालन संभव नहीं है। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र में संचालित सभी ईंट भट्टों की निष्पक्ष जांच कर अवैध रूप से संचालित भट्टों को तत्काल बंद कराया जाए साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वाले संचालकों पर जुर्माना तथा कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि पर्यावरण, खेती और ग्रामीणों की सेहत को हो रहे नुकसान पर रोक लग सके।

क्षेत्र में लगातार उठ रही शिकायतों और ग्रामीणों के विरोध के बावजूद जिम्मेदार विभागों की निष्क्रियता अब चर्चा का विषय बन गया है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले समय में पर्यावरण और कृषि व्यवस्था को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है वहीं जिले के खनिज विभाग और प्रशासनिक अमले की कार्यशैली पर भी लगातार सवाल उठने गया है।

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