
जिले की शरहद पर नाकेबंदी में पकड़े गए बस्तर के दो आरोपी युवक
बोलेरो वाहन और मोबाइल समेत 6.62 लाख रुपए का सामान बरामद
सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। शराब तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत गातापार पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मध्यप्रदेश निर्मित अंग्रेजी शराब की खेप पकड़ी है। खास बात यह है कि शराब तस्करी में इस्तेमाल की जा रही बोलेरो वाहन पर पुलिस का नाम प्लेट लगा हुआ था। पुलिस के अनुसार आरोपी इसी का इस्तेमाल करते हुए शराब की अवैध तस्करी को अंजाम दे रहे थे। नाकेबंदी के दौरान संदिग्ध बोलेरो को रोककर तलाशी लेने पर उसमें 25 पेटी गोवा व्हिस्की बरामद हुई। मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक जब्त शराब की कुल मात्रा 225 बल्क लीटर है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 1 लाख 50 हजार रुपए है। शराब परिवहन में प्रयुक्त बोलेरो वाहन की कीमत करीब 5 लाख रुपए आंकी गई है। इसके अलावा आरोपियों के कब्जे से तीन मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं, जिनकी कीमत करीब 12 हजार रुपए बताई गई है। इस तरह पुलिस ने कुल करीब 6 लाख 62 हजार रुपए का सामान जब्त किया है।
नाकेबंदी के दौरान पकड़ाई संदिग्ध बोलेरो जीप
शराब तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए गातापार पुलिस द्वारा क्षेत्र में लगातार निगरानी और नाकेबंदी की जा रही थी। इसी दौरान पुलिस टीम ने एक संदिग्ध बोलेरो वाहन को रोककर जांच की। वाहन पर पुलिस का नाम प्लेट लगा होने से वह प्रथम दृष्टया पुलिस वाहन जैसा प्रतीत हो रहा था। तलाशी लेने पर बोलेरो के अंदर मध्यप्रदेश निर्मित गोवा व्हिस्की की बड़ी खेप मिली। इसके बाद पुलिस ने शराब, वाहन और मोबाइल फोन जब्त कर दोनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया।

दोनों आरोपी कोण्डागांव जिले के निवासी
पुलिस ने मामले में अंकित कुमार नामदेव (35 वर्ष) पिता आनंद कुमार नामदेव निवासी बीएनके (दण्डकारण्य वार्ड) कॉलोनी कोण्डागांव तथा सुभम सरकार (30 वर्ष) पिता रूप कुमार सरकार निवासी बीएनके (दण्डकारण्य वार्ड) कॉलोनी कोण्डागांव को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपियों के खिलाफ थाना गातापार में अपराध क्रमांक 46/2026 के तहत धारा 34(2) आबकारी एक्ट के अंतर्गत प्रकरण दर्ज किया गया है। पुलिस द्वारा दोनों आरोपियों को न्यायालय के समक्ष पेश किया जा रहा है।
पुलिस के नाम का इस्तेमाल जांच का विषय
शराब तस्करी के लिए बोलेरो वाहन पर पुलिस का नाम प्लेट लगाए जाने की बात सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि आरोपियों ने यह नाम प्लेट कहां से हासिल की और इसके जरिए शराब तस्करी के दौरान पुलिस की पहचान का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा था। मामले में शराब की सप्लाई और तस्करी से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा सकती है।
