Advertisement
IMG-20241028-WA0001
IMG-20241028-WA0002
previous arrow
next arrow
छत्तीसगढ़

साहित्यकार डॉ.जीवन यदु को मिला राज्य अलंकरण पुरस्कार

छग शासन ने लाला जगदलपुरी साहित्य पुरस्कार से किया सम्मानित

सत्यमेव न्यूज़/खैरागढ़. साहित्यकार डॉ.जीवन यदु को छत्तीसगढ़ राज्य अलंकरण सम्मान से नवाजा गया है. छत्तीसगढ़ शासन ने राज् य के 22वें स्थापना दिवस अवसर पर रायपुर में आयोजित राज्योत्सव के मुख्य समारोह में डॉ.जीवन यदु को लाला जगदलपुरी साहित्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. उन्हें यह सम्मान उनकी समूची साहित्यिक यात्रा खासतौर पर छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति पर विशिष्ट लेखन के लिये प्राप्त हुआ है. छत्तीसगढ़ राज्य अलंकरण समारोह 2022 के अवसर पर राज् यपाल सुश्री अनुसूईया उईके व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने डॉ.जीवन यदु को समारोहपूर्वक अलंकरण प्रतीक प्रमाण पत्र व पारितोषक प्रदान कर सम्मानित किया है.

गौरतलब है कि साहित्य के क्षेत्र में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ.जीवन यदु को पूर्व में मुक्तिबोध सम्मान, मुकिम भारती अलंकरण, छत्तीसगढ़ साहित्य सम्मेलन का प्रतिष्ठित श्री हरि ठाकुर साहित्य सम्मान, मायाराम सूरजन स्मृति लोक चेतना अलंकरण व बिसम्भर यादव च्मरहाज्सम्मान से भी सम्मानित किया जा चुका है. ज्ञात हो कि खैरागढ़ निवासी डॉ.जीवन यदु सेवा निवृत्त शिक्षक हैं एवं उन्होंने हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर के बाद छत्तीसगढ़ी कविता पर लोक संस्कृति का प्रभाव विषय पर पीएचडी भी की है.

उन्होंने आकाशवाणी रायपुर के लिये अनेक रूपकों की रचना की है साथ ही प्रगतिशील लेखक संघ एवं छत्तीसगढ़ हिन्दी साहित्य सम्मेलन के वे कार्यकारिणी सदस्य हैं. झील की मुक्ति के लिये (कविता संग्रह), अनकहा है जो तुम्हारा (गीत संग्रह), लोक स्वप्र में लिलिहंसा (निबंध), छत्तीसगढ़ी कविता : संदर्भ एवं मूल्य (आलोचना), अइसनेच रात पहाही (छत्तीसगढ़ी काव्य नाटिका), वकील की फीस (नव साक्षर साहित्य), भीमसन के पांव (नव साक्षर साहित्य), माई कोठी के धान (लोक जीवन कृति), धान के कटोरा (कविता), गंगा असन हा गिरगे (छत्तीसगढ़ी कृति) व चिरई के एका (छत्तीसगढ़ी बाल और किशोर कविता) किताब के रूप में प्रकाशित हो चुकी है. मूल रूप से डॉ.जीवन यदु की पहचान एक गीतकार के रूप में रही है और नव साक्षरता से संबंधित उनके गीत देशभर में गाये जाते हैं साथ ही छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े विश्वविद्यालय पं.रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलगीत रचना का भी श्रेय डॉ.जीवन यदु के नाम है. छत्तीसगढ़ राज्य अलंकरण पुरस्कार प्राप्त होने उपरांत उन्हें प्रगतिशील लेखक संघ, हिन्दी साहित्य सम्मेलन, पाठक मंच सहित साहित्यकारों ने बधाई व शुभकामनाएं दी है.

Satyamev News

आम लोगों की खास आवाज

Related Articles

Back to top button

You cannot copy content of this page