नदियों की निर्मलता से शुरू हुआ सफर अब ‘सेवा संकल्प’ तक

खैरागढ़. आमनेर, पिपरिया और मुस्का नदियों की निर्मलता एवं संरक्षण के लक्ष्य से वर्ष 2019 में शुरू हुआ निर्मल त्रिवेणी महाअभियान अब पर्यावरण संरक्षण, गौसेवा और जनसेवा के व्यापक उद्देश्य के साथ ‘सेवा संकल्प अभियान’ के रूप में आगे बढ़ रहा है। इसी क्रम में श्री रूख्खड़ स्वामी मंदिर गौ सेवा विहार स्थित गौशाला परिसर में वृहद पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित कर विभिन्न प्रजातियों के 200 फलदार पौधे रोपे गए। पौधारोपण में आम, मुनगा, चीकू, पपीता, जामुन, जाम सहित अनेक प्रजातियों के पौधे शामिल हैं। अभियान के आगामी चरण में 100 फलदार और 200 फूलदार पौधे और लगाए जाएंगे। इसका उद्देश्य परिसर की हरियाली बढ़ाने के साथ गौवंश, पक्षियों और अन्य जीव-जंतुओं के लिए अनुकूल प्राकृतिक वातावरण तैयार करना है।

निर्मल त्रिवेणी महाअभियान की शुरुआत 2019 में आमनेर, पिपरिया और मुस्का नदियों के संरक्षण एवं निर्मलता के संकल्प के साथ हुई थी। समय के साथ अभियान का दायरा जल संरक्षण, जलस्रोतों की रक्षा, वृक्षारोपण एवं संरक्षण, जैव-विविधता, स्वच्छता, गौसेवा तथा पक्षी एवं जीव-जंतु संरक्षण तक विस्तृत हुआ। अब इन्हीं प्रयासों को जनभागीदारी से जोड़ते हुए ‘सेवा संकल्प अभियान’ के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है।

अभियान की विशेषता केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं है बल्कि उनके संरक्षण और नियमित देखभाल पर भी जोर दिया जा रहा है। गौशाला परिसर में पूर्व में लगाए गए 50 नींबू के पौधे अब फल देने लगे हैं वहीं विकसित हो चुके छायादार पेड़ पक्षियों के आश्रय स्थल बन गए हैं। पेड़ों पर पक्षियों का बसेरा और उनकी चहचहाहट परिसर के प्राकृतिक वातावरण को जीवंत बना रही है।

100 से अधिक गौवंशों की आश्रयस्थली है गौशाला*श्री रूख्खड़ स्वामी मंदिर गौ सेवा विहार की गौशाला में 100 से अधिक गौवंश आश्रय पाए हुए हैं। यहां गौवंशों के लिए नियमित आहार की व्यवस्था के साथ उनके लिए बेहतर एवं प्राकृतिक वातावरण विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। फलदार, फूलदार और छायादार पौधों का विस्तार गौसेवा के साथ पक्षी एवं जीव-जंतु संरक्षण को भी मजबूत करेगा।

‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत जल संरक्षण एवं जलस्रोतों का पुनर्जीवन, नदियों की निर्मलता, वृक्षारोपण एवं संरक्षण, जैव-विविधता, गौसेवा, पक्षी एवं जीव-जंतु संरक्षण, स्वच्छता, जरूरतमंदों की सेवा, शिक्षा एवं संस्कार, स्वास्थ्य, सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रसेवा जैसे विषयों को शामिल किया गया है। इस प्रकार वर्ष 2019 में तीन नदियों की निर्मलता से शुरू हुआ यह अभियान आज प्रकृति, पशु-पक्षी और मानव सेवा को एक सूत्र में जोड़ते हुए ‘सेवा संकल्प’ के रूप में आगे बढ़ रहा है।

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