
निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल
दो वर्ष पहले बनी नहर की लाइनिंग कई जगह क्षतिग्रस्त
पहली बारिश में ही कटे किसानों के रास्ते

मुरूम नहीं बिछाने का आरोप, कीचड़ से आवागमन बाधित
ग्रामीणों ने उच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग
विभाग बोला- बारिश से हुआ मिट्टी का कटाव
समाधान के लिए अतिरिक्त जल निकासी संरचना का प्रस्ताव
सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। जिले में जल संसाधन विभाग द्वारा लमानिन बांध (जुरलाकला-उदरीनवागांव) से देवारीभाठ तक करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित नहर एवं उसकी कंक्रीट लाइनिंग की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। निर्माण के लगभग दो वर्ष के भीतर ही कई स्थानों पर कंक्रीट उखड़ने लगी है। ग्रामीणों का आरोप है कि पहले वर्ष में क्षतिग्रस्त हिस्सों की केवल औपचारिक मरम्मत की गई लेकिन दूसरी बारिश ने निर्माण की वास्तविक स्थिति उजागर कर दी। कई स्थानों पर कंक्रीट की परत टूटने के बाद उसके नीचे बिछाई गई काली पॉलीथिन तक दिखाई देने लगी है जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर संदेह गहरा गया है।
ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आई निर्माण की कमजोरियां
स्थल निरीक्षण के दौरान नहर की कंक्रीट लाइनिंग कई जगहों पर उखड़ी हुई मिली। ग्रामीणों का दावा है कि कंक्रीट की परत मानकों के अनुरूप पर्याप्त मोटाई की नहीं है जिसके कारण बारिश शुरू होते ही जगह-जगह दरारें पड़ गईं और परत टूटने लगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निर्माण निर्धारित गुणवत्ता के अनुसार किया गया होता तो इतनी कम अवधि में नहर की यह स्थिति नहीं होती।

पहली बारिश में कट गया किसानों का रास्ता, खेती प्रभावित
नहर निर्माण के दौरान किसानों की आवाजाही के लिए बनाए गए मार्ग भी पहली ही बारिश में क्षतिग्रस्त हो गए। दपका क्षेत्र के ग्रामीणों के अनुसार अमलही से भरकनहा खार जाने वाला संपर्क मार्ग बीच से कट जाने के कारण लगभग 200 एकड़ कृषि क्षेत्र प्रभावित हुआ है। किसानों को अब ट्रैक्टर और अन्य कृषि यंत्र लंबा रास्ता तय कर खेतों तक ले जाने पड़ रहे हैं। कई स्थानों पर किसान मजबूरी में आधुनिक कृषि उपकरणों के बजाय पारंपरिक बैलों का सहारा लेने को विवश हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई शिकायतों के बावजूद विभाग ने मार्ग बहाल करने की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए।
मुरूम नहीं बिछाने का आरोप, बारिश में कीचड़ से बढ़ी परेशानी
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि नहर किनारे बनाए गए रास्तों में मुरूम डालने का प्रावधान होने के बावजूद अधिकांश हिस्सों में इसका पालन नहीं किया गया। केवल मुख्य सड़क से लगे कुछ हिस्सों में मुरूम डालकर कार्य पूर्ण दिखा दिया गया जबकि अन्य मार्ग बारिश के दौरान कीचड़ में तब्दील हो गए। इससे किसानों और ग्रामीणों का आवागमन गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है। लोगों का आरोप है कि अधिकारियों और ठेकेदार की मिलीभगत से अधूरे कार्य का भुगतान कर दिया गया।
निष्पक्ष जांच और एफआईआर की मांग
ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराने तथा दोषी अधिकारियों एवं ठेकेदारों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए तो निर्माण गुणवत्ता और खर्च से जुड़े वास्तविक तथ्य सामने आ सकते हैं। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि कई बार शिकायत करने के बावजूद उन्हें केवल आश्वासन मिला, समाधान नहीं। समाचार प्रकाशित किए जाने तक विभागीय एसडीओ से संपर्क का प्रयास किया गया लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।
जानिए! क्या बोले विभाग के जिम्मेदार
जल संसाधन विभाग के उप अभियंता शुभम चंद्राकर ने कहा कि लमानिन बांध से देवारीभाठ तक नहर निर्माण का कार्य उनके कार्यकाल से पहले हुआ था और उनकी पदस्थापना बाद में हुई है। उनके अनुसार सूचना मिलने पर उन्होंने हाल ही में स्थल का निरीक्षण किया जहां कुछ स्थानों पर बारिश के कारण मिट्टी का कटाव और गाद जमा होने की स्थिति मिली। सिंचाई व्यवस्था प्रभावित न हो इसके लिए साफ-सफाई के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने बताया कि जहां मार्ग का कटाव हुआ है वहां भविष्य में ऐसी समस्या से बचने के लिए अतिरिक्त जल निकासी संरचना (इनलेट) बनाने का प्रस्ताव वरिष्ठ अधिकारियों को भेजा गया है। निर्माण गुणवत्ता, मुरूम के उपयोग अथवा अन्य तकनीकी अनियमितताओं की जांच और आवश्यक कार्रवाई का निर्णय कार्यपालन अभियंता एवं वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर लिया जाएगा।
