ठेलकाडीह महाविद्यालय के छात्रों ने किया भौगोलिक भ्रमण

सत्यमेव न्यूज़/ठेलकाडीह. शासकीय नवीन महाविद्यालय ठेलकाडीह के भूगोल विभाग के तत्वाधान में अध्ययनरत् छात्र-छात्राओं ने विगत् दिनों पर्यटन स्थलों का भौगोलिक-शैक्षणिक भ्रमण किया गया. संस्था के प्रभारी प्राचार्य एके श्रीवास्तव के मार्गदर्शन एवं सीएस राठौर विभागाध्यक्ष भूगोल के निर्देशन में कला संकाय के भाग एक दो एवं तीन के 42 विद्यार्थियों ने रतनपुर, चैतुरगढ़, देवपहरी, सतरेंगा, कोरबा, हसदो-बांगो परियोजना क्षेत्र तथा कुसमुंडा कोल माइंस आदि क्षेत्रों का भूगोल विषयक दो दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण किया इस भौगोलिक भ्रमण का प्रथम पड़ाव भारत के 51 सिद्ध पीठों में एक एवं दक्षिण कौशल की प्राचीन राजधानी रतनपुर में स्थित महामाया सिद्ध पीठ रहा. यहां विद्यार्थियों ने हैययवंशीय कल्चुरी शासकों द्वारा स्थापित शक्तिपीठ के दर्शन किए साथ ही कलचुरी शासनकाल के वैभवपूर्ण इतिहास एवं स्थापत्य कला से परिचित हुये. खारंग नदी की गोद में बसे प्राकृतिक सौंदर्य से संपन्न प्राचीन नगर रतनपूर के भौगोलिक स्थिति से अवगत हुये. भ्रमण का अगले पड़ाव के रूप में चैतुरगढ़ की उच्च पहाड़ी में स्थित माँ महिषासुर मर्दिनी मंदिर रहा. चैतुरगढ़ की पहाड़ियों पर चढ़ने का विद्यार्थियों के लिए विशेष अनुभव रहा. नदियों, पहाड़ियों का साक्षात्कार किया जो भूगोल विषयक ज्ञान की वृद्धि में सहायक सिद्ध हुआ. भौगोलिक यात्रा का अगला पड़ाव कोरबा जिला में स्थित देवपहरी जल प्रताप रहा जो अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए सुविख्यात है. कोरबा जिले की सत्त प्रवाहिनी नदी हसदों की निर्मल जलधारा लगभग 1500 फीट की ऊँचाई पर प्रपात बनाती है. प्रपात की मनमोहक झर-झर की ध्वनि में मानों प्रकृति मुखरित हो उठी है. यह क्षेत्र लेमरू अरण्य क्षेत्र के अंतर्गत आता है जहां गजराज परियोजना संचालित है. गजराज परियोजना वनैले-हाथियों के विचारण एवं संवर्धन तथा मानव बस्ती के क्षति हाथियों से होने क्षति से बचाने के लिए यह परियोजना संचालित है. यही पर हसदो बागो परियोजना मिनीमाता नदी परियोजना छत्तीसगढ़ का सबसे ऊँचा बांध है. लेमरू अरण्य क्षेत्र के निचले भाग में सतरेंगा प्राकृतिक झील स्थित है जो मिनीमाता नदी परियोजना का डूब क्षेत्र है. सतरेंगा झील अपने स्वच्छ नीले जल पर्यटकों का मन मोह लेता है. इस झील पर नौकायन का आनंद लिया जा सकता है. यही से उत्तरीय भाग से छत्तीसगढ़ का पाट प्रदेश प्रारंभ होता है. यहां कोरबा स्थित छज्च्ब् को भी देखने का अवसर मिला. इसी क्रम में एशिया महाद्धीप का सबसे बड़ा खुला कोल माइंस क्षेत्र को विद्यार्थियों ने देखा और जाना. भौगोलिक शैक्षणिक भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने भ्रमण क्षेत्र की मिट्टी एवं चट्टानों की संरचनाओं से परिचित हुए. इस क्षेत्र में दोमट, मटासी, मिट्टी पायी जाती है तथा बलुवा एवं आर्कीयन चट्टानो से परिचित हुए. सभी विद्यार्थियों ने आनंदित होकर पर्यटन क्षेत्र का भ्रमण किये तथा भौगोलिक तथ्यों एव दृश्यों से परिचित हुए जिससे उनकी भूगोल विषयक ज्ञान में वृद्धि हुई. इस भौगोलिक भ्रमण में डॉ.एलसी सिन्हा, सहा.प्रा. हिन्दी रेणुका कुंजाम, सहायक प्राध्यापक, वाणिज्य ने अनुरक्षण के साथ-साथ विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया.