
दुग्ध स्नान के साथ शुरू हुआ अनसर काल
15 दिनों तक प्रभु को लगेगा औषधीय काढ़ा और फलों के रस का भोग
सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। मान्यता अनुसार छत्तीसगढ़ के प्रथम भगवान जगन्नाथ मंदिर होने का गौरव प्राप्त पांडादाह स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में ज्येष्ठ पूर्णिमा के पावन अवसर पर भगवान श्री जगन्नाथ, बलभद्र (बलदाऊ) एवं माता सुभद्रा का पारंपरिक दुग्ध स्नान महोत्सव श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में संपन्न हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान का दुग्ध, दही, घी, शहद एवं शर्करा से पंचामृत महाभिषेक किया गया। इस दौरान मंदिर परिसर जय जगन्नाथ के उद्घोष और भक्ति गीतों से गुंजायमान रहा। मंदिर सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित इस धार्मिक आयोजन में पांडादाह सहित आसपास के अनेक गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं भागवत प्रेमी शामिल हुए। श्रद्धालुओं ने भगवान के दिव्य दर्शन कर पूजा-अर्चना की तथा सुख-समृद्धि और लोककल्याण की कामना की।
स्नान पूर्णिमा के बाद शुरू हुआ अनसर काल
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार स्नान पूर्णिमा के बाद भगवान श्री जगन्नाथ 15 दिनों के लिए अस्वस्थ हो जाते हैं। इस अवधि को अनसर काल कहा जाता है। इस दौरान मंदिर के पट बंद रहते हैं और भगवान को एकांत में विश्राम कराया जाता है। परंपरा के अनुसार इन 15 दिनों तक प्रभु को औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार काढ़ा तथा फलों के रस का भोग अर्पित किया जाता है। मान्यता है कि इससे भगवान स्वस्थ होकर भक्तों को नवयौवन दर्शन देते हैं। इसके पश्चात भव्य रथ यात्रा महोत्सव का आयोजन किया जाता है। इस अवसर पर मंदिर सेवा समिति के सचिव राजू यादव, उपाध्यक्ष कमलेश यदु, संतोष कर्ष, रूपेंद्र यदु, संजय यदु, ईश्वर कुंभकार, बरातू वर्मा, राजकुमार यदु, मंदिर के पुजारी संतोष वैष्णव, संतु सिन्हा, सोमनिशा खरे, प्रमिला कर्ष, प्रमिला रजक, मधुर यदु, हीरा सिन्हा, हिरावन जंघेल, अशोक यदु सहित मंदिर सेवा समिति के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे। सभी ने मंदिर सेवा समिति के माध्यम से श्रद्धालुओं से अपील की है कि अनसर काल की समाप्ति के बाद आयोजित होने वाले नवयौवन दर्शन एवं भव्य रथ यात्रा महोत्सव में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर भगवान श्री जगन्नाथ का आशीर्वाद प्राप्त करें।