चयन के बाद भी नहीं मिल रहा प्रवेश- दर-दर भटक रहे पिता-पुत्र


ये कैसा सिस्टम- भजिया बेचने वाले के बेटे ने पास की प्रयास परीक्षा, पर नहीं मिला दाखिला


सत्यमेव न्यूज खैरागढ़. मेहनत और लगन से सपनों की सीढ़ी चढ़ने वाला एक होनहार छात्र प्रशासनिक लापरवाही का शिकार हो गया। मामला ‘प्रयास’ आवासीय विद्यालय की प्रवेश परीक्षा से जुड़ा है जहां चयनित होने के बावजूद ग्राम खपरी सिरदार निवासी अनुराग सिंह राजपूत को प्रवेश नहीं मिल पाया। बालक के पालक पिता बलराम सिंह राजपूत का कहना है कि 20 अप्रैल 2025 को हुई प्रवेश परीक्षा में अनुराग का चयन हुआ था। अनुराग शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला खपरी सिरदार का विद्यार्थी रहा है। चयन के बाद विद्यालय से उसका टीसी निकालकर रायपुर स्थित गुढ़ियारी प्रयास विद्यालय बुलाया गया। जब वे बेटे को लेकर वहां पहुंचे तो अन्य बच्चों की तरह उनका भी नाम पुकारा गया लेकिन प्रवेश प्रक्रिया के दौरान बैठी शिक्षिका ने कह दिया कि “खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले वालों के लिए यहां कोई जगह नहीं है किसने आपको परीक्षा दिलवाई?” इस तरह का व्यवहार देख पिता आहत हुए।
बलराम सिंह के काफी निवेदन के बाद शिक्षिका ने उन्हें विधानसभा जाने की बात कही। वे तत्काल ऑटो किराए से विधानसभा पहुंचे जहां से उन्हें बताया गया कि हमने बात कर ली है आपके बेटे का प्रवेश हो जाएगा लेकिन जब वे वापस गुढ़ियारी विद्यालय लौटे तो उन्हें सीट फुल होने का हवाला देकर लौटा दिया गया।निराश पिता ने खैरागढ़ पहुंचकर कलेक्टर को आवेदन देकर बेटे को न्याय दिलाने की गुहार लगाई। इसके बाद वे आदिम जाति कल्याण विभाग के अधिकारी स्वर्णिम शुक्ला से भी मिले। श्री शुक्ला ने भरोसा दिलाया कि बिलासपुर प्रयास विद्यालय में प्रवेश हो जाएगा लेकिन जब बलराम ने अगले दिन फोन पर संपर्क किया तो जवाब मिला कि अब सीटें भर चुकी हैं।गौरतलब है कि अनुराग पिता दीपक सिंह राजपूत रायपुर का निवासी है किंतु वह अपने पालक पिता बलराम सिंह राजपूत के साथ ग्राम खपरी सिरदार में रहकर पढ़ाई करता है। बलराम सिंह गांव में चाय, भजिया आदि नाश्ते का ठेला लगाकर परिवार चलाते हैं। अनुराग दुकान में हाथ बंटाने के साथ ही पढ़ाई में भी मेहनत करता रहा है। अब स्थिति यह है कि चयन होने के बावजूद प्रवेश न मिलने से न सिर्फ अनुराग बल्कि पूरा परिवार हताश और निराश है। ग्रामीण भी सवाल उठा रहे हैं कि जब मेहनत और प्रतिभा से कोई बच्चा चयनित होता है तो उसे उसका हक क्यों नहीं मिलता?

