चक्रधर समारोह में खैरागढ़ कुलपति लवली शर्मा ने दी राग सरस्वती की प्रस्तुति

सितार की सुरलहरियों ने बांधा समारोह मे समां
सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त चक्रधर समारोह रायगढ़ 2025 में इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ की कुलपति एवं देश की प्रख्यात सितार वादक प्रो.लवली शर्मा ने अपनी मधुर एवं मंत्रमुग्ध कर देने वाली सितार वादन की प्रस्तुति से श्रोताओं को सुरों के अद्भुत संसार में पहुंचा दिया। डॉ.शर्मा ने राग सरस्वती पर अपनी प्रस्तुति दी जिसकी मोहकता से पूरा वातावरण संगीत मय हो उठा। प्रस्तुति के दौरान प्रतिष्ठित तबला वादक दुर्जय भौमिक ने अपनी संगत से प्रस्तुति को और भी दिव्य बना दिया।कार्यक्रम में उपस्थित श्रोता डॉ.शर्मा के वादन से इतने प्रभावित हुए कि पूरे कार्यक्रम के दौरान तालियों की गूंज लगातार बनी रही। राग की बंदिशों को जिस परिष्कृत शैली में उन्होंने प्रस्तुत किया वह उनकी उच्च शास्त्रीय साधना और वर्षों की तपस्या का प्रमाण था। डॉ.लवली शर्मा ने 15 वर्ष की आयु में श्रीमती वीणाचंद्रा से सितार वादन की प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की तत्पश्चात कोलकाता के प्रसिद्ध सितार वादक कल्याण लहरी से उन्नत प्रशिक्षण लिया। उन्होंने आगरा विश्वविद्यालय से संगीत में स्नातकोत्तर गोल्ड मेडल के साथ तथा बड़ौदा विश्वविद्यालय से 1986 में पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की। उन्हें कला भूषण सहित अनेक राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है।

लोक नृत्य की प्रस्तुतियों ने मोह लिया दर्शकदीर्घा का मन
विद्यार्थियों ने लोक नृत्य प्रस्तुतियों से बढ़ाया समारोह का गौरव इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने भी चक्रधर समारोह में लोक नृत्यों की मनमोहक प्रस्तुतियां देकर कार्यक्रम को जीवंतता प्रदान की। इन प्रस्तुतियों का आयोजन माननीय कुलपति डॉ.लवली शर्मा के संरक्षण, अधिष्ठाता लोक संगीत एवं कला संकाय प्रो.राजन यादव के मार्गदर्शन तथा सहायक प्राध्यापक डॉ.दीपशिखा पटेल के निर्देशन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत गणेश वंदना से हुई इसके पश्चात कलसा नृत्य, चटकोला नृत्य, करमा, ठिसकी एवं सैला रीना नृत्य की विविध प्रस्तुतियां दी गईं। नृत्य पक्ष में प्रमुख युवा कलाकार टेकराम, डिम्पल पुलस्त्य, सर्वजीत बाम्बेश्वर, कु.वंदना, सिद्धार्थ दिवाकर, कु.खुशी वर्मा, डेरहू, कु.नम्रता गांवर, खगेश पैकरा, कु.हर्षलता साहू, धीरेन्द्र निषाद, कु.खुलेश्वरी पटेल रहे।
गायन पक्ष में डॉ.परमानंद पाण्डेय हारमोनियम, हर्ष चन्द्राकर, मनीष, कु.सौम्या सोनी, कु.साक्षी गढ़पायले ने भाग लिया। वाद्य संगत में रामचन्द्र सर्वे तबला-मांदर, परमानंद जंघेल मांदर, खिलेश (बांसुरी), करण तारम बेंजो, राजेश निषाद मंजीरा, सूरज कुमार ने सहयोग प्रदान किया। इन सभी प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को एक सांस्कृतिक भव्यता प्रदान की जिसकी सराहना दर्शकों ने भरपूर तालियों से की।