
सत्यमेव न्यूज मुढी़पार। क्षेत्र के प्रसिद्ध मां दुर्गा मंदिर के स्थापना के 34 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर मंदिर समिति द्वारा तीन दशक से अधिक समय से आयोजित हो रहा सांस्कृतिक एवं धार्मिक आयोजन इस वर्ष भी पूरे उत्साह और भक्ति भाव के साथ मनाया गया। यह आयोजन अपने 32वें वर्ष में प्रवेश करते हुए विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। स्थापना दिवस के अवसर पर पूर्व वर्षों की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए जस गीत, झांकी, रामधुनी, रामायण पाठ, जगराता तथा पंडवानी जैसे धार्मिक और लोक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए कार्यक्रम में क्षेत्र के प्रसिद्ध लोक कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में जसगीत सम्राट दुकालू यादव, दिलीप षडंगी, अल्का चंद्राकर, नीलकमल वैष्णव, कांति कार्तिक यादव, खिलेश यादव तथा दिनेश वर्मा ने आकर्षक प्रस्तुति दी वहीं रामायण प्रस्तुति में फन्नू बैरागी और नंदकुमार साहू ने सहभागिता निभाई। पंडवानी शैली में रितु वर्मा ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। इस वर्ष विशेष रूप से पूनम सिन्हा गरियाबंद तथा सुर म्यूजिकल आर्केस्ट्रा ग्रुप देवकर के सुनील सिहोरे के कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। मंदिर समिति द्वारा जानकारी दी गई कि मां दुर्गा मंदिर में चैत्र और कुआंर नवरात्रि के दौरान भक्तों द्वारा मनोकामना ज्योति प्रज्ज्वलित करने की परंपरा निरंतर जारी है। इस आयोजन में मंदिर समिति के अध्यक्ष नरोत्तम सिन्हा, उपाध्यक्ष कोमलचंद कोटडिया, पुरुषोत्तम साहू, कोषाध्यक्ष कोमल बोथरा, भीषम पटेल, सचिव खेम सिन्हा सहित संरक्षक दाऊ भूपेंद्र सिंह ठाकुर, सुनील जैन, कुमेश साहू, गौतम चंद जैन, भीखम सिन्हा, उत्तम पटेल, संतोष सिन्हा, मूलचंद बल्लू जैन, भीखम जैन, मधुसुदन साहू, केशव साहू उपस्थित रहे। सलाहकार डी.आर. निर्मलकर और हरि साहू के साथ कार्यकारिणी सदस्य शिवलाल साहू, दिलीप यादव, बुधारू साहू, कोमल निर्मलकर, दानसिंग सिन्हा, ललित सिन्हा, प्रदीप सिन्हा, देवराज सेन, रमाशंकर पाल, संतु निषाद, देवलाल साहू, मोहन साहू, कामता साहू, भावेन्द साहू, भागचंद सिन्हा, भुवनेश्वर सिन्हा, केजू साहू, बाबा यादव, शिशुपाल सिन्हा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। कार्यक्रम में मातृशक्ति के रूप में संतोषी सेन, पुष्पा सिन्हा, जानकी साहू, लता साहू, पदमा ठाकुर, केसरी साहू, चेतन सिन्हा, मुंगेश्वरी निर्मलकर, प्रतिमा निर्मलकर, पेमीन निर्मलकर, गंगा निर्मलकर, पायल निर्मलकर, पूर्णिमा निर्मलकर, कामिनी, मधु एवं रुक्मणी की उपस्थिति रही।