खैरागढ़ विश्वविद्यालय का नाम बदला, अब ‘राजकुमारी इंदिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय’ के नाम से होगी पहचान

दीक्षांत समारोह में राज्यपाल ने की नये नाम की घोषणा

चार साल के लंबे अंतराल के बाद हुआ दीक्षांत आयोजन
सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय के 17वें दीक्षांत समारोह के मंच से ऐतिहासिक घोषणा हुई। राज्यपाल एवं कुलाधिपति रमेन डेका ने विश्वविद्यालय का नाम परिवर्तित कर “राजकुमारी इंदिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय” किए जाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि केवल ‘इंदिरा’ नाम होने से भ्रम की स्थिति बनती थी जिसे दूर करने के लिए यह निर्णय लिया गया है। लगभग चार वर्षों के अंतराल के बाद 28 जनवरी 2026 को आयोजित इस गरिमामय दीक्षांत समारोह में उपाधि और पदक पाकर विद्यार्थियों के चेहरे खुशी से खिल उठे। समारोह की अध्यक्षता राज्यपाल एवं कुलाधिपति रमेन डेका ने की। उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में तथा विश्वविद्यालय कार्यकारिणी सदस्य एवं धरसींवा विधायक डॉ.अनुज शर्मा विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगान के सामूहिक गायन से हुआ। इसके बाद मां सरस्वती की प्रतिमा एवं राजकुमारी इंदिरा के तैलचित्र पर पुष्प अर्पण कर दीप प्रज्वलन किया गया। कुलगीत की संगीतमय प्रस्तुति ने वातावरण को सांस्कृतिक गरिमा से भर दिया।

गौरवपूर्ण वातावरण में हुआ उपाधि-पदक वितरण
कुलपति प्रो.लवली शर्मा ने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को अनुशासन एवं कर्तव्यबोध की शपथ दिलाई। समारोह में 5 शोधार्थियों को डी.लिट्.
64 शोधार्थियों को शोध उपाधि 236 विद्यार्थियों को पदक (232 स्वर्ण, 4 रजत) प्रदान किए गए। यह क्षण विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों के लिए गर्व और उल्लास से भरा रहा।


विश्वविद्यालय के नये पहचान की हुई घोषणा
राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि खैरागढ़ स्थित यह संस्थान आगे चलकर “राजकुमारी इंदिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय” के नाम से जाना जाएगा। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को नाम परिवर्तन से जुड़ी सभी आवश्यक प्रक्रियाएं शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालय समाज को दिशा देने वाली ज्ञान-मशाल होते हैं और दीक्षांत समारोह उस गरिमा को नई ऊंचाई देता है। राज्यपाल ने ललित कलाओं के संरक्षण-संवर्धन में विश्वविद्यालय के योगदान को अविस्मरणीय बताया। उन्होंने कहा कि संगीत, चित्रकला, मूर्तिकला, स्थापत्य और साहित्य मानव जीवन में रस, सौंदर्य और संवेदना का संचार करते हैं। भौतिकवादी दौर में ललित कलाओं की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।

खैरागढ़ विश्वविद्यालय गुरु-शिष्य परंपरा का संवाहक-उच्च शिक्षा मंत्री
उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि शिक्षा समाज को सुसंस्कृत और सभ्य बनाने की आधारशिला है। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय के माध्यम से भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार देश-विदेश तक हो रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालय को छत्तीसगढ़ का मुकुटमणि और एशिया का गौरव बताया। कुलपति प्रो.शर्मा ने कहा कि दीक्षांत केवल प्रमाण पत्र वितरण नहीं बल्कि आत्ममंथन और भविष्य के संकल्प का दिन है। विद्यार्थियों ने प्रदेश, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर विश्वविद्यालय का मान बढ़ाया है। उन्होंने विश्वविद्यालय में हो रहे नवाचारों, शासकीय अनुदानों तथा शैक्षणिक-सांस्कृतिक गतिविधियों की जानकारी दी। ऐतिहासिक बावली की पहचान समारोह के अंतिम चरण में राज्यपाल के करकमलों से विश्वविद्यालय परिसर स्थित ऐतिहासिक बावली की ‘राजकुमारी शारदा देवी सिंह बावली’ नामपट्टिका का अनावरण किया गया। इंटेक संस्था के सहयोग से संरक्षित यह धरोहर सांस्कृतिक विरासत संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। कार्यक्रम का संचालन डॉ.कौस्तुभ रंजन व आभार प्रदर्शन कुलसचिव डॉ.सौमित्र तिवारी ने किया। समारोह में विवि के अधिष्ठाता, शिक्षक, अधिकारी-कर्मचारी, विद्यार्थी और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

