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खैरागढ़ जिले में आवारा कुत्तों का बढ़ता आतंक, चार माह में 662 लोग बने शिकार, सर्पदंश की घटनाएं भी बढ़ी

सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले में आवारा कुत्तों का बढ़ता आतंक अब गंभीर जनसुरक्षा और स्वास्थ्य समस्या बनता जा रहा है। पिछले चार महीनों में जिले के खैरागढ़ और छुईखदान ब्लॉक में कुत्तों के काटने के 662 मामले सामने आए हैं जबकि 49 लोग सांप के डंसने का भी शिकार हुए हैं। ये सभी मामले सरकारी अस्पतालों में दर्ज किए गए हैं। आंकड़ों के अनुसार जिले में प्रतिदिन औसतन 5 से 6 लोग डॉग बाइट का शिकार हो रहे हैं जिससे आम नागरिकों में दहशत का माहौल है।

स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार छुईखदान ब्लॉक में डॉग बाइट के 381 और स्नेक बाइट के 31 मामले दर्ज किए गए हैं वहीं खैरागढ़ ब्लॉक में कुत्तों के काटने के 281 तथा सांप के डंसने के 18 मामले सामने आए हैं। सबसे अधिक खतरा छोटे बच्चों, बुजुर्गों और सुबह-शाम पैदल आने-जाने वाले लोगों को बताया जा रहा है। कई मोहल्लों और ग्रामीण क्षेत्रों में आवारा कुत्तों के झुंड खुलेआम घूमते देखे जा रहे हैं।

चिकित्सकों का कहना है कि कुत्ते के काटने के बाद किसी भी प्रकार की लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। रेबीज एक घातक बीमारी है जिसका समय पर उपचार नहीं मिलने पर मरीज की जान भी जा सकती है। ऐसे में कुत्ता या सांप काटने पर सबसे पहले प्रभावित स्थान को साबुन और साफ पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए तथा बिना देर किए नजदीकी अस्पताल पहुंचना चाहिए। झाड़-फूंक या घरेलू उपचार पर निर्भर रहना खतरनाक हो सकता है।

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जिले के सभी सरकारी अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी रैबीज वैक्सीन (एआरवी) और एंटी स्नेक वेनम (एएसवी) पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। मरीजों को आवश्यकता अनुसार तत्काल उपचार और टीकाकरण की सुविधा दी जा रही है।

डॉग बाइट के लगातार बढ़ते मामलों ने नगर पालिका, नगर पंचायत और पशु चिकित्सा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है लेकिन नसबंदी, टीकाकरण और नियंत्रण अभियान प्रभावी रूप से दिखाई नहीं दे रहे हैं। स्कूलों, बाजारों, अस्पतालों और बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक स्थानों पर भी कुत्तों के झुंड आम लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल आवारा कुत्तों को पकड़ना इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। बड़े स्तर पर नसबंदी अभियान, एंटी रेबीज टीकाकरण, बेहतर कचरा प्रबंधन और नियमित निगरानी व्यवस्था लागू करनी होगी। स्थानीय निकायों और संबंधित विभागों के समन्वित प्रयासों के बिना डॉग बाइट की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण संभव नहीं होगा।

चार महीनों में सामने आए 662 डॉग बाइट के मामले यह संकेत देते हैं कि यह अब केवल स्वास्थ्य का नहीं बल्कि जनसुरक्षा का भी गंभीर विषय बन चुका है। ऐसे में नागरिकों की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या पर प्रभावी और स्थायी कार्रवाई कब तक सुनिश्चित कर पाएगा।

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