खैरागढ़ चुनाव संचालक खूबचंद पारख के साले ने ही की भाजपा के साथ गद्दारी, प्रदेश भाजपा ने किया निलंबित

भाजपा की करारी हार का हुआ खुलासा
प्रदेश महामंत्री केदार कश्यप ने किया निलंबित

सत्यमेव न्यूज़/खैरागढ़. खैरागढ़ विधानसभा उपचुनाव मे भाजपा की कड़ी मेहनत के बाद भी करारी हार का अब धीरे- धीरे खुलासा होने लगा है। काफी विरोध के बाद खैरागढ़ के चुनाव संचालक बनाये गए खूबचंद पारख के साले, छुईखदान निवासी भाजपा नेता व पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष रावलचंद कोचर ने ही अपने साथियों के साथ मिलकर अपनी ही पार्टी के साथ बड़ी गद्दारी कर दी और नतीजा यह हुआ कि कड़ी मेहनत के बाद भी भाजपा को खैरागढ़ में शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा।

कुछ महीने पहले सम्पन्न हुए खैरागढ़ विधानसभा उप चुनाव में कांग्रेस भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न था, कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल खूद मोर्चा सम्हाले हुए थे, और पूरा चुनाव बेहतर प्रबंधन के बलबूते लड़ा गया, भाजपा ने यह चुनाव पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के नेतृत्व में लड़ा और उनके ही मार्गदर्शन मे खूबचंद पारख को पहले कि तरह बेहद महत्वपूर्ण खैरागढ़ उपचुनाव का चुनाव संचालक बनाया गया था जबकि जिला भाजपा के नही चाहने के बाद भी खैरागढ़ विधानसभा के परमानेंट चुनाव संचालक खूबचंद पारख को ही बनाया गया, उस वक़्त इस निर्णय का काफी विरोध भी हुआ। ख़ासतौर परभाजपा के धूर समर्थक कार्यकर्ताओं ने यह आरोप भी लगाए की क्या चुनाव संचालक खैरागढ़ में चुनाव हराने के लिए बनाया जाता है। आखिरकार चुनाव संचालक खूबचंद पारख के साले के निलंबन के साथ ही इस तरह के आरोपों पर मुहर लगती दिख रही है।

निलंबन के साथ भाजपा की करारी हार की जिम्मेदारी भी तो तय होनी चाहिए
भाजपा में अब इस बात को लेकर बड़ी बहस और चर्चा हो रही है कि निलंबन मात्र से कब तक काम चलेगा। पार्टी के बड़े नेता ही विभीषण बन कर बखिया उधेड़ रहे हैं, खुद कटोरी में खीर रखते हैं और स्वास्थ्य के लिए अच्छा है बोलकर चना खाने की सलाह देते हैं, एक वक्त था जब भाजपा में ईमानदारी और निष्ठा की कसमें खाई जाती थी लेकिन मोदी राज में खुलेआम अपने ही पार्टी के जिताऊ प्रत्याशी को इस कदर हराने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ना बड़े आश्चर्य की बात है, भाजपा के निष्ठावान कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब प्रत्याशी चयन हुआ और यशोदा नीलांबर वर्मा के विरोध में भारतीय जनता पार्टी ने कोमल जंघेल को टिकट दी तो जीत का पैमाना कोमल जंघेल के पक्ष में 70 के मुकाबले 30 का बन गया था और पब्लिक सर्वे में बात तो भरकर आ रही थी कि कोमल जाएंगे इस चुनाव को बहुत आसानी से जीत जाएंगे लेकिन कांग्रेस ने इस चुनाव में चुनावी प्रबंधन का महागणित लगाया और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल खुद इस उप चुनाव में प्रत्याशी के मुकाबले एक चेहरा बनकर सामने रहे, जो बीपीएल थे उन्हें अपनी ओर लुढ़का लिया गया और अब नतीजा सबके सामने है।

भाजपा के इन पांच लोगों को किया गया निलंबित
भाजपा द्वारा निलंबित किए गए कार्यकताओं में रामा साहू, केशव साहू, राकेश ठाकुर, रावल कोचर, लुकेश्वरी जंघेल है। बता दे कि जिस तरह से भाजपा निलंबन की कार्यवाही की है, उससे भाजपा को मजबूती प्रदान होगी और भितरघात करने वालो को करारा जवाब भी मिलेगा । भाजपा को ऐसे और कार्यकर्ताओं को कड़ी हिदायत देनी चाहिए जो अपने रिश्तेदारों को पार्टी से जोड़ते हैं और भीतरघात कराते हैं। दूसरी ओर निलंबन की कार्रवाई में भाजपा नेत्री लुकेश्वरी जंघेल का नाम भी सामने आया है जो बीते लगभग 2 बार के चुनाव में विधानसभा की महिला भाजपा प्रत्याशी के रूप में बड़ा नाम बनकर सामने आ रही थी, लेकिन भारतीय जनता पार्टी से सदा के लिए इन पांच नेताओं का सूपड़ा साफ़ हो गया है.