खैरागढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में री-केवाईसी व वित्तीय समावेशन शिविर आयोजित

गांव-गांव तक पहुँच रही बैंकिंग सेवाएं
आरबीआई जीएम मनीष पराशर ने ग्रामीणों को दी योजनाओं की जानकारी
सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। वित्तीय समावेशन और बैंकिंग सेवाओं को आमजन तक पहुँचाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार के री-केवाईसी एवं वित्तीय समावेशन अभियान के तहत सोमवार को ग्राम कुर्सीपार घोठिया (जिला खैरागढ़-छुईखदान-गंडई) में भारतीय स्टेट बैंक खैरागढ़ शाखा द्वारा विशेष शिविर का आयोजन किया गया। इस अवसर पर भारतीय रिज़र्व बैंक के महाप्रबंधक मनीष पराशर मुख्य अतिथि रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ भारतीय स्टेट बैंक भिलाई के क्षेत्रीय प्रबंधक रूपक मंडावी ने स्वागत भाषण से किया।
री-केवाईसी से ही मिलेगी निर्बाध बैंकिंग सुविधा

मुख्य अतिथि मनीष पराशर ने कहा कि री-केवाईसी प्रक्रिया समय पर पूरी करने से बैंकिंग सेवाओं का लाभ लगातार मिलता रहेगा। यदि ग्राहक पुनः केवाईसी नहीं कराते हैं तो उनके लेन-देन प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई) और प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई) के महत्व पर भी विस्तार से जानकारी दी उन्होंने बताया कि मात्र ₹20 और ₹436 के वार्षिक प्रीमियम पर मिलने वाली ये योजनाएँ गरीब से गरीब परिवार को दो-दो लाख रुपये का सुरक्षा कवच प्रदान करती हैं। एसबीआई भिलाई के क्षेत्रीय प्रबंधक रूपक मंडावी ने कहा कि यह शिविर इस बात का प्रतीक है कि बैंक अब स्वयं गांव तक आकर सेवाएँ उपलब्ध करा रहा है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे इस अवसर का अधिकतम लाभ उठाएँ। मंडावी ने बताया कि शिविर में अन्य राष्ट्रीयकृत बैंकों के अधिकारी भी मौजूद रहे ताकि लोगों की विभिन्न बैंकिंग समस्याओं का समाधान एक ही जगह हो सके।
आयोजन में जनप्रतिनिधि और ग्रामीणों की रही बड़ी भागीदारी
शिविर में पंजाब नेशनल बैंक, आईडीबीआई बैंक, एसबीआई सहदल्ली शाखा, लीड बैंक मैनेजर सी.एस. ठाकुर, कियोस्क संचालक नरेश चोपड़ा सहित सभी बैंकों के सीएसपी संचालक मौजूद रहे। वहीं स्थानीय सरपंच सुराज कुमार साहू, सचिव ज्ञानदास साहू, पंच मंसीरदास बंजारे, गोपीचंद, रामानंद साहू सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने योजनाओं की जानकारी लेकर पंजीयन कराया। अंत में भारतीय स्टेट बैंक के मुख्य प्रबंधक ने धन्यवाद ज्ञापन देते हुए खैरागढ़ शाखा प्रबंधक और उनकी टीम की सराहना की कि उन्होंने ग्रामीण अंचल तक पहुँचकर वित्तीय समावेशन की भावना को साकार किया।