काशी हिंदू विश्वविद्यालय में खैरागढ़ के प्रो.राजन यादव हुए आमंत्रित, राष्ट्रीय मंच पर रखे विचार

मध्यकालीन हिंदी साहित्य और प्रदर्शनकारी कलाओं के अंतर्संबंधों पर दिया जोरदार व्याख्यान
सहायक प्राध्यापकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम में भी रहे आमंत्रित
खैरागढ़। राजकुमारी इंदिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ के कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो. राजन यादव ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी में आयोजित शैक्षणिक कार्यक्रमों में स्रोत पुरुष एवं मुख्य वक्ता के रूप में सहभागिता की। उन्होंने मध्यकालीन हिंदी साहित्य, भक्ति और संगीत के पारस्परिक संबंधों तथा भारतीय भाषाओं की सांस्कृतिक भूमिका पर विचार व्यक्त किए। मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र काशी हिंदू विश्वविद्यालय द्वारा 5 से 17 अक्टूबर 2026 तक आयोजित सहायक प्राध्यापकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रो.यादव को स्रोत पुरुष के रूप में आमंत्रित किया गया। इस दौरान उन्होंने भारतीय भाषाओं की विविधता और सांस्कृतिक एकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विविधताओं के बावजूद संपूर्ण भारत एक है। भाषा संस्कृति का अभिनंदन है। यह केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि विचारों, भावनाओं और संस्कारों की अभिव्यक्ति का सशक्त साधन भी है। इसी क्रम में काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संबद्ध महिला महाविद्यालय वाराणसी में ‘मध्यकालीन हिंदी साहित्य और प्रदर्शनकारी कलाएं : परंपरा और निरंतरता’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के प्रथम तकनीकी सत्र में प्रो.राजन यादव मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि ज्ञानराशि के संचित कोष का नाम साहित्य है और मध्यकालीन साहित्य अपनी प्राणवत्ता तथा मूल्यवत्ता के कारण आज भी प्रासंगिक है। भक्ति और संगीत का घनिष्ठ संबंध बताते हुए उन्होंने कहा कि संगीत के साथ काव्य उत्कृष्ट रूप धारण करता है वहीं काव्य के संयोग से संगीत की अभिव्यक्ति और अधिक निखर उठती है। मध्यकालीन कवियों की रचनाएं मुख्यतः गेय रही हैं। इस साहित्य ने लोकनाट्य परंपरा को भी प्रभावित किया है। उन्होंने काव्य, संगीत और चित्रकला के पारस्परिक संबंधों को रेखांकित करते हुए भारतीय साहित्यिक एवं कलात्मक परंपराओं की निरंतरता पर प्रकाश डाला। संगोष्ठी के इस सत्र की अध्यक्षता सीकेएम महाविद्यालय कमच्छा की प्राचार्य प्रो.आशा यादव ने की। विशिष्ट वक्ताओं में विश्व हिंदी सचिवालय के पूर्व महासचिव एवं त्रिपुरा विश्वविद्यालय के आचार्य प्रो.विनोद मिश्रा, ललित कला अकादमी लखनऊ के अध्यक्ष एवं चित्रकला के आचार्य प्रो.सुनील विश्वकर्मा, संगीत विभाग के डॉ.सुरेंद्र कुमार तथा इलाहाबाद विश्वविद्यालय के डॉ.सुमित कुमार सिंह शामिल रहे। इस अवसर पर संगोष्ठी के संयोजक डॉ. हरीश यादव ने प्रो.राजन यादव को शॉल एवं प्रतीक चिह्न भेंटकर सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन काशी हिंदू विश्वविद्यालय के डॉ.अशोक कुमार ज्योति ने किया जबकि हंसराज कॉलेज, दिल्ली के डॉ.पीयूष कुमार द्विवेदी ने आभार व्यक्त किया। प्रो.यादव की इस सहभागिता से खैरागढ़ के कला एवं साहित्य जगत को राष्ट्रीय शैक्षणिक मंच पर प्रतिनिधित्व मिला।
