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भाजपा की साय सरकार ने आंकड़ों में बड़ा पर जमीनी हकीकत से कटा हुआ बजट पेश किया- यशोदा

सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। छत्तीसगढ़ विधानसभा में राज्य बजट प्रस्तुत होने के बाद खैरागढ़ की विधायक यशोदा नीलाम्बर वर्मा ने बजट पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे आंकड़ों में बड़ा लेकिन जमीनी हकीकत से कटा हुआ बजट करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बजट लोकलुभावन घोषणाओं तक सीमित है और इसमें प्रदेश के ग्रामीण, किसान, युवा एवं कर्मचारी वर्ग की वास्तविक आवश्यकताओं की अनदेखी की गई है।
विधायक वर्मा ने कहा कि राज्य सरकार ने नए जिलों के लिए प्रावधान का उल्लेख तो किया है किंतु सभी नवगठित जिलों के लिए ठोस वित्तीय आवंटन स्पष्ट नहीं किया गया। विशेष रूप से केसीजी जिले की उपेक्षा किए जाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय संतुलन के बिना समग्र विकास संभव नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले वर्ष घोषित योजनाओं में से लगभग 50 प्रतिशत कार्य अब तक स्वीकृत नहीं हो पाए हैं फिर भी नई योजनाओं की घोषणा कर जनता को भ्रमित किया जा रहा है। बजट का आकार बढ़ा देना विकास का प्रमाण नहीं होता। उन्होंने कहा असली कसौटी यह है कि प्राथमिकताएं किसके हित में तय की गई हैं। कृषि क्षेत्र पर चिंता व्यक्त करते हुए विधायक श्रीमती वर्मा ने कहा कि प्रदेश की लगभग 70 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है लेकिन किसानों की आय वृद्धि, खेती की लागत में कमी और सिंचाई विस्तार के लिए कोई स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित नहीं किया गया है। उनके अनुसार गांवों की आर्थिक रीढ़ मजबूत किए बिना विकास का दावा खोखला है। श्रीमती वर्मा ने पूर्ववर्ती भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस सरकार की गौठान योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह योजना गोवंश संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण रोजगार सृजन का सशक्त माध्यम बनी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार ने योजना को बंद कर दिया और बजट में इसके विकल्प का भी कोई उल्लेख नहीं किया जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है। शिक्षा और रोजगार के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि हजारों शासकीय पद रिक्त हैं लेकिन भर्ती की कोई स्पष्ट कार्ययोजना सामने नहीं आई है। डी.एड. एवं बी.एड. प्रशिक्षित अभ्यर्थियों के लिए भी बजट में ठोस प्रावधान नहीं किया गया। राजधानी में महीनों से प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों की मांगों पर भी कोई समाधान नहीं निकला है। उन्होंने स्कूलों में शिक्षकों की कमी और अधोसंरचना संबंधी समस्याओं को गंभीर बताते हुए सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर विधायक ने कहा कि मेडिकल कॉलेज विस्तार के नाम पर सीमित राशि का प्रावधान किया गया है जबकि वास्तविक लागत इससे कहीं अधिक है। जिला अस्पतालों में डॉक्टरों एवं संसाधनों की कमी बनी हुई है और ग्रामीण अंचलों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की कोई स्पष्ट रूपरेखा नजर नहीं आती। रोजगार सृजन की ठोस रणनीति के अभाव, संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण पर चुप्पी, रसोइया संघ की मांगों पर निर्णय न होने तथा ₹500 में गैस सिलेंडर योजना के उल्लेख न किए जाने को भी उन्होंने बजट की प्रमुख कमियां बताया। अंत में विधायक यशोदा नीलाम्बर वर्मा ने कहा कि जब तक गांव, किसान, युवा, महिला और कर्मचारी वर्ग को केंद्र में रखकर ठोस एवं समयबद्ध निर्णय नहीं लिए जाएंगे तब तक विकास के दावे कागजों तक ही सीमित रहेंगे। उन्होंने राज्य बजट को असंतुलित एवं जमीनी जरूरतों से कटा हुआ बताते हुए सरकार से प्राथमिकताओं की पुनर्समीक्षा की मांग की।

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