
सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के मार्गदर्शन तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण राजनांदगांव के निर्देशन में उप जेल खैरागढ़ में विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन तालुक विधिक सेवा समिति खैरागढ़ के माध्यम से किया गया जिसमें विचाराधीन बंदियों को विभिन्न कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई। जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश मोहनी कंवर ने बंदियों को प्ली बारगेनिंग की प्रक्रिया समझाते हुए बताया कि ऐसे अपराध जिनमें अधिकतम सजा 7 वर्ष तक निर्धारित है या पहली बार अपराध करने वाले आरोपियों को यह सुविधा मिल सकती है। इसके तहत आरोपी मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन कर सजा में कमी के लिए सहमति आधारित समाधान अपना सकता है।उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रावधान का लाभ केवल एक बार ही लिया जा सकता है। शिविर में एनडीपीएस अधिनियम के बारे में भी जानकारी दी गई। बताया गया कि यह कानून मादक पदार्थों के उत्पादन, कब्जे, परिवहन बिक्री और उपयोग को नियंत्रित करता है और इसके उल्लंघन पर कड़ी सजा का प्रावधान है। जुडिशल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास आकांक्षा खलखो ने नि:शुल्क विधिक सहायता के अधिकार पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर वंचित या असमर्थ व्यक्तियों को शासन की ओर से निःशुल्क वकील उपलब्ध कराया जाता है। बंदी यदि स्वयं अधिवक्ता नियुक्त करने में सक्षम नहीं हैं तो वे जेल अधीक्षक के माध्यम से आवेदन प्रस्तुत कर विधिक सेवा समिति से सहायता प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने विचाराधीन बंदियों के संवैधानिक अधिकारों की जानकारी देते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति को तब तक दोषी नहीं माना जाता जब तक न्यायालय द्वारा अपराध सिद्ध न हो जाए। प्रत्येक आरोपी को अपने बचाव का पूरा अवसर प्राप्त है। इस अवसर पर पैरालीगल वालंटियर गोलूदास साहू ने आगामी 9 मई को आयोजित होने वाली नेशनल लोक अदालत की जानकारी दी और अधिक से अधिक प्रकरणों के निपटारे हेतु इसका लाभ उठाने का आग्रह किया। कार्यक्रम के दौरान न्यायाधीश ने बंदियों से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं तथा स्वास्थ्य संबंधी जानकारी ली। साथ ही जेल परिसर के बैरक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कक्ष और रसोईघर का निरीक्षण भी किया गया। शिविर में जेल अधीक्षक योगेश कुमार बंजारे, पैरालीगल वालंटियर गोलूदास साहू, सिपाही प्रेम सागर साहू, जसवंत कुमार नायक सहित अन्य कर्मचारी एवं विचाराधीन बंदी उपस्थित रहे।