संगीत नगरी खैरागढ़ में चाय की दुकान बनी सार्वजनिक कला का मंच

सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। कला केवल गैलरियों और बड़े संस्थानों तक सीमित नहीं है बल्कि वह आम लोगों के रोजमर्रा के जीवन में भी मौजूद रहती है। इसी सोच को सामने लाने के उद्देश्य से इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के कलाकार समूह ‘री:फॉर्म’ ने सार्वजनिक कला परियोजना ‘इंस्टिंक्ट’ ( स्वाभाविक प्रवृत्ति) की शुरुआत की है। इस पहल की सबसे खास बात यह है कि इसे किसी आर्ट गैलरी में नहीं बल्कि शहर की एक साधारण चाय की दुकान और उसके आसपास के सार्वजनिक स्थल पर तैयार किया गया है।
परियोजना का केंद्र उस चाय विक्रेता की ड्रॉइंग्स हैं, जो वर्षों से चाय बेचने के साथ-साथ खाली समय में चित्र बनाते रहे हैं। बिना किसी औपचारिक कला शिक्षा के उनके लिए चित्र बनाना एक सहज अभिव्यक्ति और जीवन का स्वाभाविक हिस्सा रहा है। कलाकार समूह ने इन चित्रों को गैलरी में ले जाने के बजाय उसी जगह प्रदर्शित किया जहां वे बने थे ताकि कला और उसके मूल परिवेश का संबंध बना रहे। चाय की दुकान की दीवारों, कुर्सियों, चूल्हों और आसपास की वस्तुओं के बीच इन चित्रों को स्थापित किया गया। इससे पूरी जगह एक जीवंत सार्वजनिक कला स्थल में बदल गई। परियोजना में कलाकार सौरव भौमिक और तुषार करमाकर के कार्य भी शामिल हैं। सौरव भौमिक ने चाय के डिस्पोजेबल कपों के माध्यम से उस जगह से जुड़ी स्मृतियों और सार्वजनिक जीवन को अभिव्यक्त करने का प्रयास किया, जबकि तुषार करमाकर का कार्य दुकान के पास स्थित एक पेड़ के इर्द-गिर्द विकसित हुआ जो सार्वजनिक स्थान, छाया और आजीविका जैसे विषयों को सामने लाता है। इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष आम लोगों की भागीदारी रही। चाय पीने आने वाले लोग केवल दर्शक नहीं बने बल्कि वे पूरी प्रक्रिया का हिस्सा बनते गए। कई लोगों ने कलाकारों से बातचीत की, चित्रों को करीब से देखा और उस जगह को नए नजरिए से महसूस किया। कुछ लोगों ने अपने चित्र भी बनवाए, जिससे कला के साथ उनका व्यक्तिगत जुड़ाव और गहरा हुआ। ‘इंस्टिंक्ट’ परियोजना यह संदेश देती है कि रचनात्मकता किसी विशेष वर्ग, भाषा या संस्थान तक सीमित नहीं होती। कला हमारे आसपास, रोजमर्रा के जीवन और सार्वजनिक स्थानों में पहले से मौजूद है, जरूरत केवल उसे देखने और समझने की है।
कलाकार समूह ‘री:फॉर्म’ द्वारा प्रस्तुत इस परियोजना की अवधारणा आकाश धुर्वे और ऋषभ राज ने विकसित की है।

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