KCG

प्रेमचंद की कहानी में राष्ट्रप्रेम और आज के समय की चुनौतियों पर हुआ मंथन

सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। प्रेमचंद पखवाड़ा 2026 के अंतर्गत प्रगतिशील लेखक संघ खैरागढ़ और पाठक मंच के संयुक्त तत्वावधान में दुनिया का सबसे अनमोल रतन कहानी के वर्तमान संदर्भ को लेकर विचार गोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम में कहानी के माध्यम से राष्ट्रप्रेम स्वतंत्रता सामाजिक सरोकार और वर्तमान राजनीतिक सामाजिक परिस्थितियों पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम में प्रदेश के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ.जीवन यदु की विशेष उपस्थिति रही। गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए संकल्प पहटिया ने कहा कि प्रेमचंद की यह कहानी सोजे वतन में प्रकाशित हुई थी। तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने इसी पुस्तक को आधार बनाकर प्रतिबंधित किया था और इसकी प्रतियां तक जलवाई गई थी। पाठक मंच के संयोजक डॉ.प्रशांत झा ने कहा कि प्रेमचंद ने अपने साहित्य के माध्यम से स्वतंत्रता आंदोलन की चेतना को जनमानस तक पहुंचाने का कार्य किया। दुनिया का सबसे अनमोल रतन इसी चेतना और देश के प्रति समर्पण का प्रभावशाली उदाहरण है। साहित्यकार और शिक्षक विनयशरण सिंह ने कहा कि कुछ विद्वान इस रचना को प्रेमचंद की शुरुआती कहानियों में प्रमुख मानते हैं। कहानी में व्यक्तिगत प्रेम से ऊपर देश के लिए त्याग और बलिदान की भावना को रखा गया है। टीकाराम देशमुख ने कहानी को भारतीय स्वतंत्रता की भावना जगाने वाली महत्वपूर्ण रचना बताते हुए कहा कि इसमें गुलामी के विरुद्ध तीव्र असहमति दिखाई देती है। वरिष्ठ सदस्य टी.ए. खान ने प्रेमचंद के आरंभिक लेखन और उर्दू से हिंदी साहित्य की ओर उनके सफर का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कहानी में उर्दू शब्दावली की पर्याप्त उपस्थिति उस दौर की भाषायी सांस्कृतिक पृष्ठभूमि को सामने लाती है। कार्यक्रम का संचालन रवि झोंका ने किया है। उन्होंने कहा कि लगभग एक सदी पहले लिखी गई यह देशप्रेम से ओतप्रोत कहानी आज भी पाठकों और समाज को कई सवालों पर विचार करने के लिए प्रेरित करती है। कार्यक्रम की शुरुआत में डॉ.जीवन यदु ने उपस्थित साहित्यकारों और सदस्यों का स्वागत किया। इसके बाद टीकाराम देशमुख और रवि झोंका ने प्रेमचंद की कहानी ‘दुनिया का सबसे अनमोल रतन’ का वाचन किया है। इस अवसर पर साहित्य और पाठक मंच से जुड़े सदस्य उपस्थित रहे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

You cannot copy content of this page