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पर्यटन की नई राह पर खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिला

सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। जिले में पर्यटन की अपार संभावनाओं को साकार करने की दिशा में ठोस पहल शुरू हो गई है। जिले के धार्मिक ऐतिहासिक और प्राकृतिक स्थलों को पर्यटन के रूप में विकसित करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर सक्रियता बढ़ा दी गई है। छत्तीसगढ़ टूरिज़्म बोर्ड के प्रबंध संचालक ने कलेक्टर को पत्र भेजकर संभावित पर्यटन स्थलों के विकास प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं। इसके बाद कलेक्टर कार्यालय से जनपद पंचायतों और नगर निकायों को निर्देश जारी किए गए हैं कि वे अपने क्षेत्र के पर्यटन योग्य स्थलों की जानकारी निर्धारित प्रारूप में सात दिनों के भीतर प्रस्तुत करें।

दरअसल जिले के प्रमुख धार्मिक स्थलों को तीर्थाटन और पर्यटन कॉरिडोर के रूप में विकसित करने की मांग लंबे समय से उठ रही थी। इसी उद्देश्य से गोपालपुर के गणेश मंदिर से कवर्धा के भोरमदेव मंदिर तक धर्म यात्रा निकालकर जन-जागरण किया गया। इसके बाद राजनांदगांव सांसद संतोष पांडे की अगुवाई में सांसद प्रतिनिधि एवं धर्म-यात्रा प्रमुख भागवत शरण सिंह ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मुलाकात कर मुख्यमंत्री निवास में ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में नवगठित जिले के प्रमुख धार्मिक स्थलों को संगठित रूप से विकसित करने की मांग की गई। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष प्रियंका खम्हन ताम्रकार, विक्रांत चंद्राकर सहित अन्य प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। इन प्रयासों के बाद प्रशासनिक गतिविधियां तेज हुईं और बैतालरानी घाटी जैसे स्थलों पर पहले से विकास कार्य जारी है।

कलेक्टर कार्यालय द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार पर्यटन स्थलों को राज्य स्तर पर पॉपुलर इमर्जिंग और पोटेंशियल श्रेणियों में विभाजित किया जाएगा। प्रत्येक स्थल से संबंधित ऐतिहासिक सांस्कृतिक धार्मिक प्राकृतिक और पर्यटन महत्व की विस्तृत जानकारी अनिवार्य रूप से मांगी गई है। छत्तीसगढ़ टूरिज़्म बोर्ड रायपुर ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल वही प्रस्ताव मान्य होंगे जिन्हें जिला स्तरीय पर्यटन समिति डीएलटीसी की अनुशंसा प्राप्त होगी। विकास कार्यों के लिए तैयार डीपीआर भी निर्धारित प्रारूप में भेजना अनिवार्य किया गया है।

प्रशासन द्वारा तैयार प्रारंभिक सूची में जिले के 59 प्रमुख स्थल शामिल किए गए हैं। इनमें धार्मिक स्थलों के साथ-साथ झरने, घाटियां, बांध, जलाशय, गुफाएं और ऐतिहासिक धरोहरें भी हैं। सूची में घटियारी मंदिर, बैतालरानी घाटी, धास कुंआ झरना, चोड़रा धाम, मंडीपखोल गुफा, केरापानी झरना, साल्हेवारा घाटी, बंजर नदी उद्गम कुंड, इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, ऐतिहासिक श्रीरुख्खड़ बाबा मंदिर, रूसे जलाशय, गोपालपुर गणेश मंदिर, गंडई गंगई माता मंदिर सहित कुल 59 स्थल शामिल हैं।

सांसद प्रतिनिधि भागवत शरण सिंह ने बताया कि यह क्षेत्र प्राचीन काल से ही आध्यात्मिक और धार्मिक गतिविधियों का केंद्र रहा है। प्राकृतिक संपदा और वनांचल से घिरे इस क्षेत्र को संत-महात्माओं ने साधना भूमि के रूप में चुना जिससे यहां अनेक आस्था केंद्र विकसित हुए। उन्होंने कहा कि सांसद संतोष पांडे के नेतृत्व में इस क्षेत्र को पर्यटन मानचित्र पर लाने के लिए लगातार प्रयास किए गए हैं जिसके सकारात्मक परिणाम अब दिखने लगे हैं। अधिकारियों ख़ासतौर पर कलेक्टर श्री चंद्रवाल का मानना है कि इन स्थलों के विकसित होने से धार्मिक, प्राकृतिक और ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा और खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिला राज्य के पर्यटन मानचित्र पर एक नई पहचान बनाएगा।

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