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पन्ना कृषि केन्द्र पर प्रशासनिक कार्रवाई के आसार

सत्यमेव न्यूज बाजार अतरिया। धान फसल को भारी नुकसान पहुंचाने के मामले में पन्ना कृषि केन्द्र अब प्रशासनिक शिकंजे में आता नजर आ रहा है। संयुक्त जांच और प्रयोगशाला रिपोर्ट में दोष सिद्ध होने के बाद भी कार्रवाई में हो रही देरी से नाराज किसानों ने जिला कलेक्टर को लिखित आवेदन सौंपते हुए साफ शब्दों में कहा है कि अब केवल जांच नहीं बल्कि न्याय और राहत चाहिए।

कृषि विभाग की रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन अब निर्णायक कदम उठाने की तैयारी में है। जिला कृषि अधिकारी ने संकेत दिए हैं कि एक से दो दिनों के भीतर दोषी कृषि केन्द्र के खिलाफ ठोस कार्रवाई की जा सकती है। इस पूरे मामले पर जिलेभर के किसानों की नजरें टिकी हुई हैं।

डूंडा, अछोली और दुल्लापुर के प्रभावित किसानों ने कलेक्टर को सौंपे आवेदन में चार प्रमुख मांगें रखी हैं।
पहली फसल क्षति का तत्काल सर्वे कर उचित मुआवजा दिया जाए। दूसरी पन्ना कृषि केन्द्र का लाइसेंस निलंबित या निरस्त किया जाए। तीसरी कीटनाशक अधिनियम के तहत संचालक और कर्मचारियों पर अभियोजनात्मक कार्रवाई हो। चौथी अमानक दवाएं सप्लाई करने वाली कंपनियों पर अलग से कार्रवाई की जाए।

किसानों का कहना है कि शासकीय जांच में यह स्पष्ट हो चुका है कि पन्ना कृषि केन्द्र द्वारा नियम विरुद्ध तरीके से दवाओं का विक्रय किया गया और अवैज्ञानिक सलाह दी गई। इसके बावजूद यदि कार्रवाई में विलंब होता है तो यह किसानों के साथ खुला अन्याय होगा। फसल बर्बादी से टूटा किसानों का हौसला पीड़ित किसान गजेश कुमार वर्मा, सहसराम वर्मा और मनोहर जंघेल ने बताया कि गलत दवाओं और अत्यधिक रसायनों के उपयोग से धान की फसल दूध अवस्था में ही सूख गई। बालियां भरने से पहले ही बर्बाद हो गईं, जिससे पूरी साल की मेहनत मिट्टी में मिल गई।

फसल खराब होने के चलते किसान सहकारी समितियों में धान बेचने से वंचित रह गए। वहीं साहूकारों से लिया गया कर्ज और केसीसी के माध्यम से लिया गया ऋण अब सिरदर्द बन चुका है। किसानों का कहना है कि नुकसान केवल आर्थिक नहीं बल्कि मानसिक और सामाजिक भी है। बाजार अतरिया में दर्जनों कृषि केन्द्र निगरानी नदारद किसानों ने प्रशासन का ध्यान इस ओर भी दिलाया है कि बाजार अतरिया क्षेत्र में दो दर्जन से अधिक कृषि केन्द्र संचालित हैं जिन पर नियमित जांच और निगरानी नहीं हो रही। यदि समय रहते सख्ती नहीं बरती गई तो ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति होती रहेगी।

किसानों ने सवाल उठाया है कि जब संयुक्त जांच दल और प्रयोगशाला रिपोर्ट में दोष स्पष्ट है तो कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है। उन्होंने आशंका जताई है कि कहीं कृषि केन्द्र के संचालक पर विभागीय स्तर पर कोई मेहरबानी तो नहीं बरती जा रही। प्रशासन ने दिया कार्रवाई का भरोसा जिला कृषि अधिकारी राजकुमार सोलंकी ने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर उचित निर्णय लिया जा रहा है और एक दो दिनों में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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