नकली शराब कांड के बाद हरकत में आया आबकारी विभाग, सवालों के घेरे में पूरी व्यवस्था

सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। जिले में सामने आए नकली शराब मामले के बाद आबकारी विभाग अब सक्रिय नजर आ रहा है। विभाग द्वारा कर्मचारियों को ब्लैकलिस्ट करने, निलंबन और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने जैसी कार्रवाई की जा रही है लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतने समय तक विभाग करता क्या रहा? नकली शराब की बॉटलिंग और बिक्री का कारोबार चलता रहा और जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी जानकारी तक नहीं लगी। मामले के उजागर होने के बाद अब विभाग सुधारात्मक कदमों का दावा कर रहा है। ड्यूटी के दौरान शराब सेवन करते पाए गए एक कर्मचारी को निलंबित किया गया है वहीं कुछ कर्मचारियों को ब्लैकलिस्ट किया गया है। खैरागढ़ की देशी और विदेशी मदिरा दुकानों में ओवररेटिंग रोकने के नाम पर आरक्षकों की तैनाती की गई है लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि ओवररेटिंग, अव्यवस्था और संदिग्ध गतिविधियों की शिकायतें लंबे समय से होती रही हैं जिन पर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई।
कम्पोजिट मदिरा दुकान जालबांधा में एक लाख 24 हजार 450 रुपये की कमी पाए जाने के बाद संबंधित कर्मचारियों से राशि वसूली गई है। इससे यह भी सवाल खड़ा हो गया है कि शराब दुकानों में आर्थिक गड़बड़ियों की निगरानी व्यवस्था कितनी कमजोर है। यदि नियमित जांच और पारदर्शी निगरानी होती तो इतनी बड़ी राशि की कमी सामने ही क्यों आती? विभाग ने अब उड़नदस्ता टीम, रात्रिकालीन गश्त और औचक निरीक्षण की बात कही है। आबकारी उपनिरीक्षक जीवेश मिश्रा को निरीक्षण की जिम्मेदारी भी दी गई है। हालांकि लोगों का मानना है कि यदि पहले से गंभीरता दिखाई जाती तो नकली शराब जैसे मामले सामने नहीं आते और विभाग की छवि पर सवाल नहीं उठते। शराब के शौकीन स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शराब दुकानों में सिर्फ कार्रवाई का दिखावा नहीं बल्कि स्थायी सुधार की जरूरत है। अवैध शराब, ओवररेटिंग और कर्मचारियों की मनमानी पर लंबे समय से शिकायतें होती रही हैं लेकिन विभागीय स्तर पर ठोस नियंत्रण दिखाई नहीं दिया। अब जब मामला सार्वजनिक हुआ और पुलिस कार्रवाई हुई तब आबकारी विभाग सख्ती का दावा कर रहा है। मामले को लेकर जनता का मानना है कि सिर्फ छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई कर जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती। इस पूरे मामले में विभागीय जवाबदेही तय होना भी जरूरी है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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