चार साल से राजनांदगांव में अटका डीएमएफ का भुगतान, बार-बार पत्राचार के बाद भी नहीं जारी हुई राशि

सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) मद से स्वीकृत विकास कार्यों का भुगतान वर्षों से लंबित रहने के कारण खैरागढ़-छुईखदान-गंडई (केसीजी) जिले की पंचायतें आर्थिक संकट का सामना कर रही हैं। कार्य पूर्ण होने, मूल्यांकन, सत्यापन और सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने के बावजूद राजनांदगांव जिले से भुगतान जारी नहीं होने पर पंचायत प्रतिनिधियों में गहरी नाराजगी है। ग्राम पंचायत मंडला की सरपंच ने चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर भुगतान नहीं हुआ तो पंचायत पदाधिकारियों के साथ संबंधित कार्यालय का घेराव किया जाएगा।

जानकारी अनुसार वित्तीय वर्ष 2022-23 में तत्कालीन राजनांदगांव जिले के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत मंडला को डीएमएफ मद से वृक्षारोपण एवं सुरक्षा कार्य के लिए 10 लाख रुपये की स्वीकृति मिली थी। कार्य निर्धारित समय पर पूरा कर लिया गया तथा विभागीय मूल्यांकन और सत्यापन भी हो चुका है। इसके बाद केवल 5 लाख रुपये का भुगतान किया गया जबकि शेष 4 लाख 57 हजार 885 रुपये के भुगतान हेतु वर्षों पहले ही मांग पत्र भेज दिया गया था। इसके बावजूद आज तक राशि जारी नहीं हो सकी है।

यह समस्या केवल ग्राम पंचायत मंडला तक सीमित नहीं है। जनपद पंचायत खैरागढ़ ने 3 फरवरी 2026 और 9 फरवरी 2026 को कलेक्टर (जिला खनिज न्यास) राजनांदगांव को पत्र भेजकर अन्य लंबित भुगतानों की राशि जारी करने का अनुरोध किया है। लंबित मामलों में ग्राम पंचायत जुरलाकला में डीएमएफ मद से निर्मित आंगनबाड़ी भवन के लिए 2 लाख 59 हजार 900 रुपये तथा ग्राम पंचायत केसला के आश्रित ग्राम खपरीकलार में सामुदायिक बाड़ी एवं चारागाह की चैन फेंसिंग कार्य के लिए 2 लाख 59 हजार 900 रुपये का भुगतान भी अब तक लंबित है। इन सभी कार्यों के उपयोगिता प्रमाण-पत्र, कार्य पूर्णता प्रमाण-पत्र, माप पुस्तिका (एमबी), गुणवत्ता प्रमाण-पत्र तथा फोटोग्राफ सहित सभी आवश्यक दस्तावेज राजनांदगांव भेजे जा चुके हैं।

भुगतान की मांग को लेकर जनपद पंचायत खैरागढ़ लगातार प्रयास करता रहा है। वर्ष 2023, 2024, 2025 और 2026 में कई बार राजनांदगांव जिला प्रशासन को पत्र भेजे गए लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। परिणामस्वरूप वर्षों से भुगतान की फाइलें लंबित पड़ी हैं और पंचायतों को उनका बकाया नहीं मिल पाया है।

जिला विभाजन के बाद यह मामला प्रशासनिक जिम्मेदारी के बीच उलझ गया है। केसीजी जिला प्रशासन का कहना है कि संबंधित डीएमएफ फंड अब भी राजनांदगांव जिले के नियंत्रण में है। जब तक वहां से राशि जारी नहीं होगी, भुगतान संभव नहीं है। दूसरी ओर राजनांदगांव से राशि जारी नहीं होने के कारण पूरा मामला वर्षों से अधर में लटका हुआ है।

भुगतान नहीं मिलने का सबसे अधिक असर ग्राम पंचायतों और जनप्रतिनिधियों पर पड़ रहा है। मंडला की सरपंच का कहना है कि कार्य पूरा कराने के लिए उन्होंने निजी स्तर पर उधार लेकर राशि खर्च की थी। अब लगातार सप्लायर भुगतान की मांग कर रहे हैं, लेकिन राशि नहीं मिलने से कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है और आर्थिक संकट गहराता जा रहा है।

जब कार्य स्वीकृत हुआ, समय पर पूरा हुआ, विभागीय मूल्यांकन और सत्यापन भी हो गया तथा सभी आवश्यक दस्तावेज जमा किए जा चुके हैं, तब आखिर चार वर्षों से भुगतान क्यों लंबित है? क्या जिला विभाजन का खामियाजा पंचायतों, मजदूरों और सप्लायरों को भुगतना पड़ेगा? अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रशासन जिम्मेदारी तय कर लंबित भुगतान कब तक जारी करेगा।

प्रेम कुमार पटेल मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत केसीजी ने कहा कि मंडला सहित अन्य लंबित डीएमएफ कार्यों की जानकारी उनके संज्ञान में है। संबंधित सरपंच भी इस संबंध में उनसे मिल चुके हैं। उन्होंने बताया कि भुगतान के लिए राजनांदगांव जिला प्रशासन को दोबारा पत्राचार किया जाएगा। चूंकि ये कार्य तत्कालीन राजनांदगांव जिले की कार्ययोजना के तहत स्वीकृत हुए थे इसलिए भुगतान की प्रक्रिया वहीं से पूरी होनी है। यदि किसी कारणवश राशि अब तक जारी नहीं हुई है तो आवश्यक पत्राचार कर शीघ्र निराकरण कराया जाएगा। राजनांदगांव जिले के प्रभारी खनिज शाखा एवं संयुक्त कलेक्टर प्रकाश टंडन ने कहा कि पुराने लंबित मामलों की उन्हें पूरी जानकारी नहीं है, क्योंकि वे पिछले लगभग एक वर्ष से इस शाखा का प्रभार देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि जनपद पंचायत खैरागढ़ नोडल अधिकारी के माध्यम से लंबित कार्यों, स्वीकृत राशि और बकाया भुगतान का विस्तृत विवरण उपलब्ध कराती है, तो मामले की जांच कर नियमानुसार भुगतान जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि पूर्व में मोहला-मानपुर जिले के लंबित प्रकरणों में भी इसी प्रकार राशि जारी की जा चुकी है। हिमांशु गुप्ता मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत खैरागढ़ ने कहा हमारे द्वारा इस संबंध में पत्र भेजा गया है और आगे की आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

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