
दूसरे दिन शास्त्रीय संगीत, सितार वादन, नाट्य प्रस्तुति और लोकधुनों ने बांधा समा

महोत्सव में देर रात तक कला प्रेमियों व कला साधक छात्रों ने दी उपस्थिति
सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ में आयोजित खैरागढ़ महोत्सव के दूसरे दिन का सांस्कृतिक परिदृश्य विविध कलाओं के अद्भुत समन्वय से सजा रहा। शास्त्रीय गायन, विलक्षण सितार वादन, प्रसिद्ध रचना राम की शक्ति पूजा की रंगाभिनय प्रस्तुति तथा छत्तीसगढ़ी लोकधरोहर दूधमोंगरा ने दर्शकों को देर रात तक मंत्रमुग्ध किए रखा।

विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों की सामूहिक प्रस्तुति ने दी सुरीली शुरुआत

महोत्सव का शुभारंभ विश्वविद्यालय के संगीत संकाय के तंत्रिवाद्य विभाग के विद्यार्थियों की सामूहिक प्रस्तुति से प्रारंभ हुआ। सितार, सरोद और वायलिन के समस्वर संयोजन ने सभागार में रागात्मकता का सुहावना वातावरण रचा। इसके पश्चात अवनद्ध वाद्य विभाग के विद्यार्थियों द्वारा तबला वादन प्रस्तुत किया गया जिसने कार्यक्रम की गति और ऊर्जा को नई ऊँचाई दी।

शास्त्रीय गायन में पं.हरीश तिवारी की मनोहारी प्रस्तुति ने किया मंत्रमुग्ध
दिल्ली से पधारे प्रख्यात गायक पं.हरीश तिवारी ने अपने पारंपरिक अंदाज़ में शास्त्रीय गायन प्रस्तुत कर दर्शकों को भाव-विभोर किया। उनकी ख़ूबसूरत तानों, आलापों और सुगठित बंदिशों ने संपूर्ण वातावरण में सुरमयी गूंज भर दी।

यादगार रहा पद्मभूषण पं.बुधादित्य मुखर्जी का अद्वितीय सितार वादन
कार्यक्रम का आकर्षण रहा विश्वप्रसिद्ध सितार वादक पद्मभूषण पं.बुधादित्य मुखर्जी का मनोहारी वादन। रागश्री से आरंभ हुई उनकी प्रस्तुति ने अपने विलक्षण मींड, बेलन तकनीक और तार-संगति की सूक्ष्मता से श्रोताओं की भरपूर प्रशंसा बटोरी। आलाप से लेकर झाला तक उनकी प्रस्तुति तालियों की गड़गड़ाहट के बीच देर तक चलती रही।

राम की शक्ति पूजा की हुई जीवंत नाट्य प्रस्तुति


दिल्ली से आए व्योमेश शुक्ला एवं समूह ने प्रसिद्ध काव्यनाटक राम की शक्ति पूजा का प्रभावशाली मंचन किया। राम और रावण के मध्य निर्णायक युद्ध के पूर्व प्रसंगों व युद्ध विजय के लिए शक्ति की उपासना को भावपूर्ण अभिनय, संगीत और संवादों के माध्यम से प्रस्तुत कर दर्शकों को अत्यंत रोमांचित किया जिसकी खूब सराहना हुई।

दूधमोंगरा ने महोत्सव में छत्तीसगढ़ी लोक-संस्कृति का रचा रंग

महोत्सव का समापन छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकपरंपरा पर आधारित दूधमोंगरा की प्रस्तुति से हुआ। लगभग पचास वर्षों से संस्कृति-संरक्षण में अग्रणी यह संस्था प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ.पी.सी. लाल यादव के निर्देशन में कार्यरत है। लोक कलाकारों द्वारा प्रस्तुत ऊर्जावान नृत्य, गीत और पारंपरिक वाद्यों की थिरकन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। देर रात तक दर्शकों की उमड़ी भीड़ सांस्कृतिक कार्यक्रमों को देखने के लिए शहर और आस-पास के क्षेत्रों से आए दर्शकों की भीड़ देर रात तक महोत्सव में बनी रही। विविध कला रूपों के संगम ने महोत्सव के दूसरे दिन को यादगार बना दिया।
