खैरागढ़ के चोपड़ा दम्पत्ति ने राख बनने के बजाय चिकित्सा शिक्षा के लिए देहदान का लिया संकल्प

चोपड़ा दंपत्ति ने पेश की समाज के लिए प्रेरणादायी मिसाल
सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। अक्सर लोग जीवन भर दूसरों की सेवा करते हैं लेकिन बहुत कम ऐसे होते हैं जो मृत्यु के बाद भी समाज के काम आने का संकल्प लेते हैं। खैरागढ़ नगर के गोलबाजार निवासी चोपड़ा दंपत्ति ने ऐसा ही एक अनुकरणीय निर्णय लेकर समाज के सामने नई सोच प्रस्तुत की है। 71 वर्षीय किशन चोपड़ा और उनकी 67 वर्षीय पत्नी पुष्पा देवी चोपड़ा ने मृत्यु के बाद अपने शरीर को अग्नि के हवाले करने के बजाय चिकित्सा शिक्षा के लिए दान करने का निर्णय लिया है। ज्ञात हो कि चोपड़ा दंपत्ति ने राजनांदगांव स्थित अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा महाविद्यालय के शरीर रचना शास्त्र विभाग में देहदान से संबंधित सभी औपचारिक प्रक्रियाएं पूर्ण कर ली हैं। उनका मानना है कि मृत्यु के बाद भी शरीर यदि चिकित्सा छात्रों की शिक्षा में उपयोगी बन सके तो इससे बड़ा पुण्य और कोई नहीं हो सकता। किशन चोपड़ा ने बताया कि देहदान का विचार उनके मन में स्वयं आया जिसे जब उन्होंने अपनी पत्नी से साझा किया तो पुष्पा देवी ने भी सहर्ष सहमति दी। इसके बाद पुत्र और दोनों पुत्रियों से चर्चा की गई जिन्होंने माता-पिता के इस निर्णय को गर्व के साथ स्वीकार करते हुए पूरा समर्थन दिया। नगर के मेडिकल व्यवसायी नवीन जैन सहित समाज के अन्य प्रबुद्धजनों से मार्गदर्शन लेकर सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी की गई। उल्लेखनीय है कि किशन चोपड़ा वर्ष 1978 में नगर पालिका खैरागढ़ के उपाध्यक्ष के पद पर भी रह चुके हैं और समाजसेवा से उनका पुराना नाता रहा है। उनके इस निर्णय पर जैन समाज सहित नगर के नागरिकों ने दंपत्ति के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त किया है। किशन चोपड़ा ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि मृत्यु के बाद शरीर को राख में बदलने के बजाय यदि देहदान किया जाए तो वही शरीर भावी डॉक्टरों के निर्माण में सहायक बन सकता है और अनगिनत जिंदगियों को बचाने का माध्यम बन सकता है। चोपड़ा दंपत्ति का यह कदम न केवल मानवीय मूल्यों को सशक्त करता है बल्कि समाज को सकारात्मक दिशा देने वाला भी है।