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पुल निर्माण को लेकर राजनीतिक श्रेय लेने की मची होड़

सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। पुल निर्माण की स्वीकृति को लेकर इन दिनों राजनीतिक श्रेय लेने की होड़ मची हुई है और घोषणाओं पर दावों की जंग तेज होने लगी है। गौर करें कि गंडई क्षेत्र में कर्रा नाला और सुरही नदी पर प्रस्तावित उच्च स्तरीय पुलों के निर्माण को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है। पुल निर्माण की स्वीकृति और पहल का श्रेय लेने को लेकर जनप्रतिनिधियों के परस्पर दावों ने क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। पहले जिला पंचायत अध्यक्ष प्रियंका खम्हन ताम्रकार ने एक बयान और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के साथ अपनी चर्चा वाली तस्वीर जारी कर कहा कि मुख्यमंत्री ग्राम सुराज अभियान के दौरान ग्राम कृतबांस में कर्रा नाला एवं सुरही नदी पर उच्च स्तरीय पुल निर्माण की घोषणा की गई थी। उन्होंने इस महत्वपूर्ण परियोजना की घोषणा को धरातल पर उतारने के लिए मुख्यमंत्री सहित संबंधित जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासनिक अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इसके ठीक अगले दिन विधायक यशोदा वर्मा ने बजट प्रावधानों का हवाला देते हुए पुल निर्माण की स्वीकृति को अपनी पहल का परिणाम बताया। विधायक के अनुसार उनके द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों के आधार पर कर्रा नाला और सुरही नदी के साथ-साथ टिकरापारा स्थित मोती नाला पर भी उच्च स्तरीय पुल निर्माण को मंजूरी प्रदान की गई है जबकि टिकरा पारा पुल के लिए गोकुल नगर पार्षद और भाजपा नेता चंद्रशेखर यादव ने अपने और अपनी पूर्व पार्षद पत्नी के संघर्षों का हवाला देकर निर्माण स्वीकृति पूरी होने की बात कही। इसके इतर इन समूची परियोजनाओं को अपने जनप्रतिनिधित्व की उपलब्धि के रूप में विधायक श्रीमती यशोदा ने प्रस्तुत किया है। लगातार सामने आ रहे इन बयानों से यह स्पष्ट हो गया है कि क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण इस बुनियादी ढांचा परियोजना को लेकर राजनीतिक श्रेय लेने की प्रतिस्पर्धा तेज हो गई है वहीं दूसरी ओर क्षेत्रवासियों की अपेक्षाएँ राजनीतिक दावों से परे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि उन्हें इस बात से कोई सरोकार नहीं कि श्रेय किसे मिलता है बल्कि उनकी प्राथमिकता वर्षों से चली आ रही बुनियादी मांग और आवागमन की समस्या का स्थायी समाधान है। ग्रामीणों ने मांग की है कि घोषणाओं और दावों से आगे बढ़ते हुए पुल निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ किया जाए और तय समयसीमा में इसे पूर्ण किया जाए ताकि आम जनता को इस बहु प्रतीक्षित निर्माण कार्य का वास्तविक लाभ मिल सके क्योंकि ऐसी घोषणा है पूर्व के शासनकाल में भी की गई थी लेकिन प्रदेश में सरकार बदलने के बाद निर्माण कार्य की स्वीकृति भी रद्द कर दी जाती है और ऐसी स्थिति में खामियाजा जनता को भुगतना पड़ता है।

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