
एजेंटों की संपत्तियों और प्रशासनिक भूमिका पर उठे सवाल
खैरागढ़-छुईखदान-गंडई क्षेत्र के कई एजेंट भी जांच के घेरे में
सत्यमेव न्यूज छुईखदान। छत्तीसगढ़ सहित देश के कई हिस्सों में फैले दो बड़े वित्तीय घोटाले अनमोल इंडिया चिट फंड और सहारा इंडिया परिवार ने लाखों निवेशकों की जमा पूंजी को संकट में डाल दिया है। अनुमान है कि इन दोनों मामलों में कुल मिलाकर करीब 1.75 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि निवेशकों से जुटाई गई जिसका बड़ा हिस्सा अब तक वापस नहीं मिल सका है। वर्षों बीत जाने के बाद भी प्रभावित लोगों को राहत नहीं मिलने से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। इन घोटालों का असर केवल बड़े निवेशकों तक सीमित नहीं रहा बल्कि किसान, छोटे व्यापारी, मजदूर और मध्यमवर्गीय परिवारों की मेहनत की कमाई भी इसमें फंस गई। निवेशकों का कहना है कि अलग-अलग सरकारों के दौरान कई बार आश्वासन दिए गए लेकिन अब तक ठोस समाधान सामने नहीं आया।
क्षेत्रीय एजेंटों पर भी लग रहे आरोप
खैरागढ़-छुईखदान-गंडई क्षेत्र में भी इन योजनाओं के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों से निवेश कराया गया था। सूत्रों के अनुसार कुछ एजेंटों ने डबल रिटर्न और गारंटीड प्रॉफिट जैसे वादों के जरिए लोगों को निवेश के लिए प्रेरित किया। आरोप है कि निवेश से जुटाई गई रकम से कुछ एजेंटों ने अपने नाम पर महंगी गाड़ियां, जमीन, मकान और व्यावसायिक भवन तक खरीदे। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कई एजेंट आज भी अन्य नामों से कारोबार करते नजर आते हैं जबकि जांच एजेंसियों की कार्रवाई अपेक्षाकृत धीमी बताई जा रही है। कुछ लोगों का यह भी आरोप है कि इस तरह की गतिविधियां प्रशासनिक स्तर की अनदेखी के बिना संभव नहीं हो सकतीं
मालिकों की संपत्तियों और जीवनशैली पर सवाल
अनमोल इंडिया चिट फंड के मालिक मोहम्मद खालिद मेमन और उनके परिजनों के विदेश में होने की चर्चा है। वहीं सहारा समूह के संस्थापक सुब्रत रॉय के निधन के बाद भी कंपनी से जुड़े वित्तीय मामलों को लेकर विवाद बना हुआ है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में अनमोल प्रकरण में लगभग 44 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का उल्लेख किया गया है जबकि आरोपियों से जुड़ी कई संपत्तियों और वाहनों को जब्त करने की कार्रवाई भी हुई है। सहारा मामले में भी हजारों करोड़ रुपये की राशि के अटके होने की बात सामने आती रही है।
रिफंड प्रक्रिया और राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप
केंद्र सरकार ने वर्ष 2023 में सहारा रिफंड पोर्टल शुरू किया था जिसके माध्यम से निवेशकों से दावे मंगाए गए। हालांकि कई निवेशकों का कहना है कि उनकी राशि अब तक वापस नहीं मिल पाई है और बड़ी संख्या में दावों की प्रक्रिया लंबित बताई जा रही है। छत्तीसगढ़ में भी अनमोल चिट फंड मामले में कई एफआईआर दर्ज की गई हैं लेकिन मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी और निवेशकों को पैसा लौटाने की प्रक्रिया अभी भी लंबी बताई जा रही है। इस पूरे मुद्दे को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दल एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहे हैं। पीड़ित निवेशकों और स्थानीय नागरिकों की मांग है कि घोटालों की तेज और पारदर्शी जांच हो, जिम्मेदार लोगों की संपत्तियां जब्त कर निवेशकों को भुगतान किया जाए
व एजेंटों की भूमिका की भी विस्तृत जांच कर कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि उनकी मेहनत की कमाई वर्षों से फंसी हुई है और अब उन्हें केवल ठोस कार्रवाई और वास्तविक रिफंड का इंतजार है।


