
विधायक के आंदोलन चेतावनी का पत्र सोशल मीडिया में हुआ वायरल
पंचायतों को पर्याप्त काम और फंड नहीं मिलने से सरपंचों में नाराजगी
क्षेत्र के सरपंचोँ ने दी है इस्तीफे तक की चेतावनी
खैरागढ़। जिले की मूलभूत समस्याओं को लेकर बुधवार 16 सितंबर को प्रस्तावित कलेक्टोरेट घेराव को लेकर ग्रामीणों के साथ सरपंच, पंचायत प्रतिनिधि और अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधि भी बड़ी संख्या में शामिल होने की तैयारी में हैं। आंदोलन के जरिए सड़क, पेयजल, बिजली, सिंचाई, स्वास्थ्य, शिक्षा, राजस्व, रोजगार, आवास और राशन सहित विभिन्न समस्याओं के निराकरण की मांग प्रशासन और सरकार के सामने रखी जाएगी। डोंगरगढ़ विधायक हर्षिता स्वामी बघेल ने 12 सितंबर को कलेक्टर, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई को पत्र भेजकर एक दिवसीय धरना प्रदर्शन और कलेक्टोरेट घेराव की पूर्व सूचना दी है। आंदोलन को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में भी तैयारियां तेज हो गई हैं।
गांव का विकास करना चाहते हैं लेकिन पंचायतों के पास फंड नहीं
आंदोलन के बीच जिले के कई सरपंचों में भी नाराजगी सामने आ रही है। सरपंचों का कहना है कि ग्रामीणों ने उन्हें गांव के विकास की जिम्मेदारी सौंपी है, लेकिन पंचायतों को पर्याप्त राशि और विकास कार्य उपलब्ध नहीं होने के कारण वे चाहकर भी ग्रामीणों की छोटी-छोटी समस्याओं का समाधान नहीं कर पा रहे हैं।नाली की सफाई, पेयजल व्यवस्था, स्वच्छता और अन्य जरूरी कार्यों के लिए भी पंचायतों को राशि का इंतजार करना पड़ रहा है। इसके चलते गांव की रोजमर्रा की समस्याओं को लेकर ग्रामीणों का सीधा दबाव सरपंचों पर पड़ रहा है। सरपंचों का कहना है कि पंचायतों के पास यदि पर्याप्त संसाधन ही नहीं होंगे तो वे ग्रामीणों की अपेक्षाओं पर कैसे खरे उतरेंगे।
सरपंच बोले- काम और राशि नहीं मिली तो दे देंगे पद से इस्तीफा
कई सरपंचों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में वे लगातार दबाव में काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि “हम सरपंच गांव के विकास के लिए बने हैं लेकिन जब पंचायत के पास काम कराने के लिए फंड ही नहीं होगा तो विकास कैसे होगा।” सरपंचों के एक वर्ग का कहना है कि यदि पंचायतों को पर्याप्त विकास कार्य और राशि उपलब्ध नहीं कराई गई तो उनके सामने इस्तीफा देने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। प्रस्तावित आंदोलन को वे सरकार के सामने पंचायतों की वास्तविक स्थिति रखने और उन्हें पर्याप्त काम, अधिकार एवं वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने की मांग के रूप में देख रहे हैं।
अनुभवी सरपंचों का दावा- पहले छोटे काम भी आसानी से हो जाते थे
आंदोलन में शामिल होने की तैयारी कर रहे अनुभवी सरपंचों का कहना है कि पूर्व में पंचायतों को किसी न किसी रूप में विकास कार्य मिलते रहते थे। इससे गांव की छोटी-बड़ी जरूरतों को स्थानीय स्तर पर पूरा करने में मदद मिलती थी। उनका आरोप है कि वर्तमान में स्थिति ऐसी हो गई है कि पंचायतों को दस लाख रुपये के विकास कार्य के लिए भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सरपंचों के अनुसार इसका सीधा असर गांवों की बुनियादी व्यवस्था पर पड़ रहा है। ग्रामीणों की छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान के लिए भी पंचायत प्रतिनिधियों को अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इससे पंचायत प्रतिनिधियों में असंतोष बढ़ रहा है।
ग्रामीण समस्याओं के साथ पंचायतों के अधिकार और फंड का मुद्दा भी रहेगा प्रमुख
बुधवार को प्रस्तावित कलेक्टोरेट घेराव अब केवल सड़क, बिजली, पानी और अन्य मूलभूत सुविधाओं की मांग तक सीमित नहीं रहने वाला है। पंचायतों को पर्याप्त विकास कार्य, समय पर राशि और प्रभावी अधिकार दिए जाने का मुद्दा भी आंदोलन में प्रमुखता से उठने की संभावना है। ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों की बढ़ती भागीदारी को देखते हुए 18 सितंबर का प्रस्तावित प्रदर्शन प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आंदोलन के जरिए पंचायत प्रतिनिधि सरकार से गांवों के विकास के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने और स्थानीय स्तर की समस्याओं के त्वरित निराकरण की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग करेंगे।



