
किसानों की सुविधा और बढ़ती लागत के बीच संतुलन बनाने हुआ मंथन
बैठक में धान कटाई की दरें की गई तय
खड़ी फसल के 3 हजार तो गिरी फसल के 3500 रुपये प्रति एकड़ तय
खैरागढ़। धान कटाई के आगामी सीजन को देखते हुए ग्राम नवागांवकला स्थित चेंद्री मंदिर परिसर में कंबाइन हार्वेस्टर मालिकों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में डीजल, मशीनरी के पुर्जों और रखरखाव की बढ़ती लागत पर चर्चा करते हुए धान कटाई की नई दरें निर्धारित की गईं। सहमति के अनुसार खड़ी धान की कटाई के लिए 3,000 रुपये तथा गिरी हुई फसल की कटाई के लिए 3,500 रुपये प्रति एकड़ दर तय की गई है। बैठक में हार्वेस्टर संघ के गठन के साथ पदाधिकारियों का मनोनयन भी किया गया। इसमें रविन्द्र वर्मा को अध्यक्ष, रूपलाल वर्मा को उपाध्यक्ष, देवेंद्र वर्मा को सचिव तथा राहुल सिंह ठाकुर को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई।*खड़ी और गिरी फसल के लिए अलग-अलग दर तय*बैठक में फसल की स्थिति के अनुसार कटाई की दरें निर्धारित करने पर सहमति बनी। संघ के सदस्यों ने खड़ी धान की कटाई के लिए 3,000 रुपये प्रति एकड़ और खेत में गिरी हुई धान की फसल की कटाई के लिए 3,500 रुपये प्रति एकड़ की दर तय की। गिरी हुई फसल की कटाई में अधिक मेहनत और समय लगने को अलग दर निर्धारित करने का आधार माना गया।
बढ़ती मंहगाई के बीच लागत बढ़ने से बढ़ी चुनौती
बैठक में उपस्थित संघ के सदस्य राहुल सिंह ठाकुर ने बताया कि किसानों को समय पर कटाई की सुविधा उपलब्ध कराना संघ की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि डीजल, मशीनरी के कलपुर्जों और रखरखाव पर होने वाले खर्च में लगातार वृद्धि हो रही है वहीं दिन-ब-दिन महंगाई भी बढ़ रही है। ऐसे में हार्वेस्टर संचालकों की लागत को ध्यान में रखते हुए दरों पर सहमति बनाई गई है। दरें तय करने का उद्देश्य किसानों को कटाई के दौरान सुविधा उपलब्ध कराने के साथ हार्वेस्टर संचालकों की आजीविका और परिचालन लागत के बीच संतुलन बनाए रखना है। बैठक में निर्धारित दरों से आगामी धान कटाई सीजन में किसानों और हार्वेस्टर संचालकों के बीच बेहतर समन्वय के साथ कामकाज संचालित होने की उम्मीद जताई गई।

