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7 से पिपरिया में होगा राष्ट्रीय संत असंग देव साहेब का द्विदिवसीय सत्संग महोत्सव

सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। क्षेत्र के पिपरिया गांव में 7 और 8 फरवरी को राष्ट्रीय संत असंग देव साहेब के सान्निध्य में दो दिवसीय आध्यात्मिक सत्संग महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम की तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं और आयोजन समिति ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर आध्यात्मिक लाभ लेने की अपील की है। कार्यक्रम संयोजक एवं वरिष्ठ अधिवक्ता घम्मन साहू ने जानकारी देते हुए बताया कि यह आयोजन सदगुरु कबीर पारख सेवा संस्थान कबीर आश्रम पिपरिया द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सत्संग कार्यक्रम के माध्यम से समाज में नैतिक मूल्यों सदाचार और नशामुक्ति का संदेश दिया जाएगा।

आयोजन की रूपरेखा के अनुसार 7 फरवरी शनिवार को सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक विभिन्न संतों द्वारा बीजक पाठ भजन और प्रवचन का कार्यक्रम आयोजित होगा। इसमें संत सरे साहेब नादिया मठ संत कुमार साहेब, संत भूषण साहेब, संत शीलशरण साहेब अयोध्या संत विजय साहेब और संत कोमल साहेब अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। इसके बाद दोपहर 1 बजे से शाम 5 बजे तक राष्ट्रीय संत असंग देव साहेब का भव्य स्वागत समारोह आयोजित किया जाएगा। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहेंगे। स्वागत के पश्चात संत असंग देव साहेब का सत्संग प्रवचन प्रारंभ होगा। शाम 7 बजे से रात्रि 9.30 बजे तक संध्या पाठ भजन संध्या और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे जिसमें भक्तिमय प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी। इस दौरान संत कुमार साहेब, संत भूषण साहेब और संत नंदन साहेब भी उपस्थित
रहेंगे।

8 फरवरी रविवार को भी सत्संग भजन और प्रवचन का क्रम जारी रहेगा जिसमें श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक मार्गदर्शन और सामाजिक जागरूकता के संदेश दिए जाएंगे। आयोजन समिति महिला समिति ट्रस्ट समिति तथा क्षेत्रीय भक्त मंडल ने सभी धर्मप्रेमियों से कार्यक्रम में शामिल होने का आग्रह किया है।

संत असंग देव देश के प्रमुख संत कथावाचक और आध्यात्मिक मार्गदर्शक के रूप में जाने जाते हैं। वे अपने सत्संगों के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन और नशामुक्ति का संदेश देने के लिए प्रसिद्ध हैं। उनके प्रवचनों से बड़ी संख्या में लोग प्रेरित होकर सामाजिक बुराइयों से दूर रहने का संकल्प लेते हैं। 20 अक्टूबर 1966 को उत्तर प्रदेश के सीतापुर में जन्मे संत असंग देव ने वर्ष 1989 में आध्यात्मिक जीवन को अपनाया। वे तपोभूमि विश्व कल्याण आश्रम लखीमपुर खीरी से जुड़े हुए हैं। उनकी प्रवचन शैली सरल सहज और व्यवहारिक मानी जाती है। वे अपने संदेशों में नशाखोरी दहेज प्रथा और पारिवारिक विवादों को समाप्त करने पर विशेष बल देते हैं।

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