
राज्य शिक्षक सम्मान से सम्मानित प्रधान पाठक ने शाला को बनाया नवाचार और डिजिटल शिक्षा का केंद्र, बच्चों के सर्वांगीण विकास पर विशेष जोर
सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। शासकीय प्राथमिक शाला मरदकठेरा के प्रधान पाठक राजेश कुमार प्रजापति पिछले 18 वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में समर्पण नवाचार और रचनात्मक प्रयोगों के माध्यम से अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। पारंपरिक शिक्षण पद्धति के साथ आधुनिक तकनीकों और गतिविधि आधारित शिक्षा को जोड़कर उन्होंने बच्चों के लिए पढ़ाई को सरल रोचक और प्रभावी बनाने का प्रयास किया है। राजेश प्रजापति को 5 सितंबर 2025 को राजभवन रायपुर में राज्य शिक्षक सम्मान से सम्मानित किया गया। इससे पहले वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण शिक्षक सम्मान समारोह के तहत उन्हें शिक्षादूत सम्मान से भी अलंकृत किया जा चुका है।
नवाचार आधारित शिक्षा पर जोर
शाला में वे संस्कारयुक्त एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ शिक्षण सहायक सामग्री का उपयोग करते हुए बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाने पर जोर देते हैं। सामान्य ज्ञान चर्चा योग एवं व्यायाम स्मार्ट कक्षा कामिशिबाई थिएटर पीएलसी सदस्यों के साथ चर्चा सामुदायिक सहभागिता और पालक संपर्क जैसी गतिविधियों को भी शिक्षण प्रक्रिया का हिस्सा बनाया गया है। बच्चों के कौशल विकास के लिए बस्तामुक्त कक्षा क्रियात्मक शोध कार्य ऑनलाइन कक्षाएं समर कैंप तथा जवाहर नवोदय विद्यालय प्रवेश परीक्षा की तैयारी में सोशल मीडिया के उपयोग जैसे प्रयोग भी किए गए हैं। रंगोली चित्रकला मूर्तिकला बाल संसद कबाड़ से जुगाड़ और शिक्षण सहायक सामग्री निर्माण जैसी गतिविधियों के माध्यम से बच्चों की रचनात्मकता को बढ़ावा दिया जा रहा है।
सम्मान की राशि भी बच्चों के नाम
राजेश प्रजापति का शिक्षा के प्रति समर्पण केवल कक्षा तक सीमित नहीं है। शिक्षादूत सम्मान में प्राप्त राशि और अपनी राशि मिलाकर उन्होंने शाला के लिए एलईडी खरीदा। राज्य शिक्षक सम्मान में प्राप्त राशि के साथ स्वयं की राशि मिलाकर विद्यालय में दर्ज सभी विद्यार्थियों के लिए हाउस ड्रेस लोअर और टी-शर्ट उपलब्ध कराए। अपने जन्मदिन को भी वे बच्चों के लिए खास बनाने का प्रयास करते हैं। इस अवसर पर विद्यार्थियों को कॉपी पेन शैक्षिक सामग्री टाई-बेल्ट आदि वितरित करने के साथ न्योता भोजन कराया जाता है। डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उन्होंने अपने जन्मदिन पर शाला के बच्चों के लिए कंप्यूटर भी खरीदा ताकि ग्रामीण परिवेश के विद्यार्थी तकनीक आधारित शिक्षा से परिचित हो सकें।
हर शनिवार बनता है ‘बैगलेस दिवस’
बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ व्यावहारिक और रचनात्मक शिक्षा देने के लिए विद्यालय में प्रत्येक शनिवार ‘बैगलेस दिवस’ आयोजित किया जाता है। इस दौरान विद्यार्थी क्राफ्ट वर्क मूर्तिकला रंगोली और अनुपयोगी वस्तुओं से उपयोगी सामग्री तैयार करने जैसी गतिविधियों में भाग लेते हैं। इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में रचनात्मक सोच कौशल विकास आत्मविश्वास और टीम भावना विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं स्वच्छता अभियान पर्यावरण जागरूकता और विद्यालय परिसर को स्वच्छ रखने जैसी गतिविधियों के जरिए विद्यार्थियों में जिम्मेदारी और नेतृत्व क्षमता का विकास किया जा रहा है। राजेश प्रजापति के शैक्षणिक नवाचार और व्यक्तिगत संसाधनों से विद्यालय के विकास में योगदान ने उन्हें एक समर्पित सृजनात्मक और प्रेरणादायक शिक्षक के रूप में स्थापित किया है। उनका प्रयास शिक्षा को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित रखने के बजाय बच्चों के व्यक्तित्व और सर्वांगीण विकास से जोड़ने की दिशा में लगातार जारी है।