स्कूली पाठ्यक्रम में विनय शरण सिंह की रचनाओं को मिला स्थान

सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। नगर के कवि एवं लेखक विनय शरण सिंह की साहित्यिक रचनाओं को छत्तीसगढ़ के स्कूली पाठ्यक्रम में महत्वपूर्ण स्थान मिला है। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) द्वारा तैयार कक्षा 4 की नई हिंदी पाठ्य-पुस्तक ‘वीणा’ में उनकी एक कविता को शामिल किया गया है। इसके साथ ही प्राथमिक एवं माध्यमिक कक्षाओं के लिए तैयार सहायक वाचन की पुस्तकों में भी उनकी कविता, कहानी और बस्तर की जीवनरेखा कही जाने वाली इंद्रावती नदी पर लिखा शब्द-चित्र संकलित किया गया है। इंद्रावती नदी पर आधारित इस शब्द-चित्र में लेखक ने नदी के प्राकृतिक सौंदर्य के साथ उसके सांस्कृतिक और जीवनगत पक्षों को संवेदनशीलता एवं प्रभावशाली शब्दों में उकेरा है। नदी और उससे जुड़े बस्तर के जनजीवन, प्रकृति और संस्कृति का जीवंत चित्रण इसे क्षेत्रीय साहित्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाता है। गौरतलब है कि इस शैक्षणिक सत्र से प्रदेश के विद्यालयों में कक्षा 3 से 8 तक हिंदी विषय के साथ सहायक वाचन की पुस्तकें भी पढ़ाई जा रही हैं। इन पुस्तकों में छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति, लोकजीवन, धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों के साथ प्रदेश की विभिन्न विभूतियों के जीवन और उनके योगदान से जुड़े पाठों को शामिल किया गया है। इसी क्रम में विनय शरण सिंह की रचनाओं का चयन उनके साहित्यिक अवदान के साथ-साथ स्थानीय परिवेश और क्षेत्रीय साहित्य को शिक्षा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। विनय शरण सिंह लंबे समय से कविता, कहानी, व्यंग्य और साहित्यिक लेखन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उनकी रचनाएं बाल वाटिका, अहा जिंदगी, राजस्थान पत्रिका, ककसाड़ और अट्टहास जैसी प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। स्कूली पाठ्यक्रम में उनकी रचनाओं का चयन उनके साहित्यिक योगदान की पहचान के साथ ही बस्तर और छत्तीसगढ़ के स्थानीय जीवन, प्रकृति एवं संस्कृति को विद्यार्थियों तक पहुंचाने का माध्यम भी बनेगा। उनकी रचनाओं को पाठ्यक्रम में स्थान मिलने से साहित्यिक और शैक्षिक जगत में प्रसन्नता का माहौल है।

Exit mobile version