सोमनाथ स्वाभिमान सांस्कृतिक यात्रा में शामिल हुए खैरागढ़ के साहित्यकार और जनप्रतिनिधि

सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। सोमनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार के 1000 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ एवं ‘सोमनाथ स्वाभिमान सांस्कृतिक यात्रा’ में जिला खैरागढ़-छुईखदान-गंडई के साहित्यकारों, कलाकारों और जनप्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता कर जिले का गौरव बढ़ाया। इस यात्रा में शामिल प्रतिनिधिमंडल ने प्रथम ज्योतिर्लिंग भगवान सोमनाथ के दर्शन कर सांस्कृतिक और आध्यात्मिक एकता का संदेश दिया। भारत सरकार के केंद्रीय पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मस्व विभाग के सहयोग से आयोजित इस यात्रा को राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक माना जा रहा है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ से चयनित प्रतिनिधियों के दल को मुख्यमंत्री एवं संस्कृति मंत्री ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यात्रा के दौरान खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के प्रतिनिधियों ने भगवान सोमनाथ के चरणों में जिले की पवित्र नर्मदा, डोंगेश्वर महादेव, आमनेर और मुस्का नदी का जल अर्पित किया साथ ही रुक्खड़ स्वामी, शिव मंदिर घटियारी तथा देउर मंदिर (गंडई) की पवित्र मिट्टी समर्पित कर जिले की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का प्रतीकात्मक सम्मान किया।

प्रतिनिधिमंडल में साहित्यकार डॉ.पीसीलाल यादव, डॉ.सियाराम साहू, डॉ.पद्मा साहू, राजकुमार मसखरे, बोधन चंदेल, धर्मेंद्र जंघेल और दूजराम साहू शामिल रहे वहीं जनप्रतिनिधियों में प्रदेश कार्यसमिति सदस्य घम्मन साहू, सांसद प्रतिनिधि भागवत शरण सिंह, नगर पालिका अध्यक्ष गिरजा नंद चंद्राकर, मंडल अध्यक्ष गोरेलाल वर्मा, पार्षद देविन कोठले, भुवन वर्मा, विष्णु साहू, मुकेश, नीरज साहू, शरद महाराज और हर्ष वर्मा ने सहभागिता निभाई। जिला प्रशासन की ओर से समाज कल्याण विभाग के नोडल अधिकारी कमलेश पटेल सहित कुल 21 विशिष्ट प्रतिनिधि इस यात्रा में सम्मिलित हुए। यात्रा के दौरान सोमनाथ मंदिर परिसर में छत्तीसगढ़ के कलाकारों और साहित्यकारों ने अपनी सांस्कृतिक एवं साहित्यिक प्रस्तुतियों से प्रदेश की समृद्ध लोक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। इस अवसर पर देशभर से आए श्रद्धालुओं ने भी छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को सराहा। यात्रा से लौटे साहित्यकारों और जनप्रतिनिधियों ने इसे अत्यंत प्रेरणादायक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अविस्मरणीय अनुभव बताते हुए छत्तीसगढ़ शासन एवं भारत सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि इस प्रकार की यात्राएं देश की सांस्कृतिक एकता को सुदृढ़ करने के साथ-साथ विभिन्न राज्यों की लोक परंपराओं और विरासत को एक-दूसरे से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।

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