
नौ उत्कृष्ट शिक्षक ‘शिक्षादूत’ और ‘ज्ञानदीप’ सम्मान से नवाजे गए, अतिथियों ने शिक्षा में नवाचार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण को बताया समय की जरूरत
सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान नवाचार और समर्पण के लिए शिक्षकों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी/हिंदी माध्यम विद्यालय खैरागढ़ में जिला स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में जिले के नौ उत्कृष्ट शिक्षकों को उनके शैक्षणिक योगदान के लिए ‘शिक्षादूत’ एवं ‘ज्ञानदीप’ सम्मान से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में जिला पंचायत उपाध्यक्ष विक्रांत सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी पटेल, जिला शिक्षा अधिकारी मुकुल साव, नगर पालिका परिषद खैरागढ़ की अध्यक्ष गिरिजा चंद्राकर, पूर्व जिला पंचायत सदस्य घम्मन साहू, आयुष सिंह बोनी, गोरे लाल वर्मा, रूपेंद्र रजक, विकासखंड शिक्षा अधिकारी खैरागढ़ नीलम राजपूत, विकासखंड शिक्षा अधिकारी छुईखदान गिरेंद्र सुधाकर, सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी खैरागढ़ किशोरी लाल अमेला तथा विद्यालय के प्राचार्य डॉ. कमलेश्वर सिंह राजपूत सहित अन्य अतिथि उपस्थित रहे। समारोह की शुरुआत मां सरस्वती के तैलचित्र पर माल्यार्पण सरस्वती वंदना एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुई। अतिथियों का पुष्प भेंट कर स्वागत किया गया। इसके पश्चात शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों के सम्मान का सिलसिला शुरू हुआ। सम्मान समारोह में शिक्षकों के शैक्षणिक नवाचार विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और विद्यालयीन शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने में उनके योगदान को रेखांकित किया गया।
शिक्षक समाज निर्माण के प्रमुख शिल्पी
मुख्य अतिथि विक्रांत सिंह ने कहा कि राष्ट्र निर्माण की मजबूत नींव विद्यालयों में तैयार होती है और इस प्रक्रिया में शिक्षक की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। शिक्षक विद्यार्थियों को केवल विषयों का ज्ञान ही नहीं देते बल्कि उन्हें संस्कार नैतिक मूल्य और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण भी प्रदान करते हैं। बदलते सामाजिक और तकनीकी परिवेश में बच्चों के सामने नई चुनौतियां हैं ऐसे में शिक्षक का दायित्व और भी बढ़ जाता है। उन्होंने सम्मानित शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी कार्यनिष्ठा अन्य शिक्षकों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने विद्यालयों के विकास शैक्षणिक संसाधनों के विस्तार तथा शिक्षकों से जुड़े विषयों पर जिला पंचायत स्तर से हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी पटेल ने शैक्षणिक संस्थानों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और शैक्षणिक विकास के लिए प्रशासन की प्रतिबद्धता व्यक्त की। जिला शिक्षा अधिकारी मुकुल साव ने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों के भविष्य और व्यक्तित्व निर्माण के वास्तविक शिल्पी हैं। उन्होंने शिक्षकों से बदलते समय के अनुरूप शिक्षण पद्धतियों में नवाचार अपनाने तकनीक का सकारात्मक उपयोग करने तथा विद्यार्थियों में तार्किक सोच विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विद्यालय का वातावरण ऐसा होना चाहिए जहां हर बच्चा सहज और निर्भीक होकर सीख सके।
छह शिक्षकों को ‘शिक्षादूत’, तीन को ‘ज्ञानदीप’ सम्मान
समारोह में छह शिक्षकों को ‘शिक्षादूत सम्मान’ तथा तीन शिक्षकों को ‘ज्ञानदीप सम्मान’ प्रदान किया गया। अतिथियों ने सम्मानित शिक्षकों को शॉल, श्रीफल, प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। ‘शिक्षादूत सम्मान’ से शासकीय प्राथमिक शाला सहसपुर विकासखंड खैरागढ़ के प्रधान पाठक बलीराम वर्मा, शासकीय प्राथमिक शाला टेकापारकला विकासखंड खैरागढ़ की प्रधान पाठक भुनेश्वरी लहरे, शासकीय प्राथमिक शाला कुकुरमुड़ा, विकासखंड खैरागढ़ की सहायक शिक्षक कुसुमलता ध्रुव, शासकीय प्राथमिक शाला बेलगांव, विकासखंड छुईखदान की प्रधान पाठक जया परिहार शासकीय प्राथमिक शाला मुरई विकासखंड छुईखदान की सहायक शिक्षक पदमनी चंदेल तथा शासकीय प्राथमिक शाला ठंडार, विकासखंड छुईखदान की सहायक शिक्षक चन्द्रशीला त्रिपाठी को सम्मानित किया गया। इसी तरह ‘ज्ञानदीप सम्मान’ से शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला सिंगारघाट, विकासखंड खैरागढ़ के शिक्षक चन्द्रशेखर गुनी, शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला भोरमपुर, विकासखंड छुईखदान के शिक्षक अवध राम चंदेल तथा शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला सोनभट्ठा विकासखंड खैरागढ़ की शिक्षक नाजरीन नियाजी को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की ओर से अतिथियों को सम्मान स्वरूप प्रेरणादायी पुस्तकें भेंट की गईं। कार्यक्रम का संचालन व्याख्याता अखिलेश श्रीवास्तव ने प्रभावी ढंग से किया जबकि आभार प्रदर्शन समग्र शिक्षा के नोडल अधिकारी आत्मा राम साहू ने किया। समारोह में संकुल के शिक्षक-व्याख्याता विभिन्न विद्यालयों के प्रतिनिधि छात्र-छात्राएं प्रबुद्ध नागरिक एवं गणमान्यजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। अंत में सभी ने छत्तीसगढ़ के राज्यगीत ‘अरपा पैरी के धार’ का सामूहिक गायन किया। राज्यगीत के सस्वर गायन के साथ समारोह का गरिमामय समापन हुआ। आयोजन को सफल बनाने में शिक्षक-व्याख्याताओं तथा छात्र-छात्राओं का सहयोग सराहनीय रहा।