संयुक्त जांच में हुआ खुलासा, गलत दवाओं से ही हुई तीन किसानों की धान फसल तबाह

सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। विकासखंड के डुंडा, अछोली और दुल्लापुर गांव के तीन किसानों की धान फसल बर्बाद होने के मामले में की गई संयुक्त जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। अतरिया स्थित पन्ना कृषि केन्द्र द्वारा किसानों को गलत, आवश्यकता से अधिक मात्रा में और नियमों के विपरीत कीटनाशक व फफूंदनाशक दवाएं दिए जाने की पुष्टि हुई है। जांच दल की रिपोर्ट के अनुसार अवैज्ञानिक छिड़काव से फसलों में फाइटो-टॉक्सिसिटी उत्पन्न हुई जिससे धान की बालियां अंदर से खोखली रह गईं और उपज पूरी तरह नष्ट हो गई।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि पन्ना कृषि केन्द्र से बेची गई कुछ दवाएं प्रयोगशाला परीक्षण में अमानक पाई गईं। ‘कोजो टॉप’ और ‘जी स्टार’ नामक दवाओं को सब-स्टैंडर्ड घोषित किया गया है। राज्य कीटनाशी गुण नियंत्रण प्रयोगशाला ठेलकाडीह, राजनांदगांव की रिपोर्ट के आधार पर संबंधित फर्म और कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर बिक्री पर रोक लगाई गई है। रिपोर्ट में उल्लेख है कि एक ही कीट या रोग के लिए किसानों को कई-कई प्रकार की दवाएं एक साथ दी गई, वह भी तय मात्रा से कहीं अधिक। इसके चलते पौधों में असामान्य वृद्धि, पत्तियों का लाल-पीला होना और दूध भरने की अवस्था में बालियों का सूख जाना पाया गया। जांच दल ने इसे न सिर्फ आर्थिक बल्कि पर्यावरणीय क्षति भी बताया है।

जांच में कृषि केन्द्र में नियमों की खुली अनदेखी उजागर हुई। दुकान में न तो कीटनाशकों का स्टॉक और मूल्य सूची प्रदर्शित थी न ही विक्रय पंजी संधारित किया गया। कई बिलों में जीएसटी नंबर और हस्ताक्षर तक नहीं पाए गए जबकि मासिक प्रतिवेदन भी जमा नहीं किए गए। इससे शासन को राजस्व हानि होने की बात कही गई है।
तकनीकी प्रभारी की अनुपस्थिति में बिक्री
रिपोर्ट के अनुसार दुकान की तकनीकी प्रभारी दीक्षा वर्मा की गैरमौजूदगी में राजकुमार वर्मा और कर्मचारी धनंजय शिवारे द्वारा दवाओं की बिक्री की जाती रही जो कीटनाशक अधिनियम 1968 और नियम 1971 का सीधा उल्लंघन है। बिना अधिकृत तकनीकी सलाह के किसानों को भारी मात्रा में रसायन देना गंभीर लापरवाही माना गया है।

तीनों किसान यथा गजेश वर्मा, सहसराम वर्मा और मनोहर जंघेल के मामलों में जांच दल ने स्पष्ट कहा है कि अधिक मात्रा और गलत संयोजन की दवाओं के कारण ही फसलें बर्बाद हुई। मनोहर जंघेल के मामले में ‘टैगमाइसिन’ की अधिक मात्रा को भी नुकसान का प्रमुख कारण बताया गया है। संयुक्त जांच पूरी होने के बाद पीड़ित किसानों में न्याय और मुआवजे की उम्मीद जगी है। किसानों का कहना है कि उनकी सालभर की मेहनत नष्ट हो गई और अब शासन से अपेक्षा है कि दोषी कृषि केन्द्र पर सख्त कार्रवाई कर उन्हें उचित मुआवजा दिलाया जाएगा। कीटनाशक निरीक्षक लुकमान साहू ने बताया कि जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि फसल बर्बादी का मुख्य कारण फर्जी दवा नहीं बल्कि अधिक मात्रा और गलत मिश्रण में दी गई दवाएं हैं। तकनीकी व्यक्ति की अनुपस्थिति में दवा बिक्री को उन्होंने गंभीर नियम उल्लंघन बताया। पूरे मामले की पुष्टि सात सदस्यीय संयुक्त जांच दल द्वारा की गई है।

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