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विश्वविद्यालय में ‘कला एवं व्यक्तित्व’ पर विशेष व्याख्यान आयोजित

सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। इन्दिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ में कुलपति प्रो. (डॉ.) लवली शर्मा के संरक्षण में श्रुति मंडल द्वारा ‘कला एवं व्यक्तित्व’ विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रज्ञा प्रवाह के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य रामाशीष सिंह रहे। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षकगण शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। अपने व्याख्यान में रामाशीष सिंह ने कला और व्यक्तित्व के गहरे संबंध पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि व्यक्तित्व का मूल स्रोत व्यक्ति के भीतर ही होता है उसे बाहर तलाशने की आवश्यकता नहीं है। उदाहरणों के माध्यम से उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि व्यक्तित्व विकास केवल बाहरी व्यवहार से नहीं बल्कि भीतर की चेतना साधना और आत्मअनुशासन से विकसित होता है। उन्होंने कला साधना के संदर्भ में कहा कि गुरु की भूमिका व्यक्ति को उसकी आंतरिक क्षमता शक्ति और संभावनाओं से परिचित कराना है जबकि उस साधना को निखारने और पूर्णता तक पहुंचाने का दायित्व स्वयं साधक का होता है। इस दौरान उन्होंने नाट्यशास्त्र के प्रकटीकरण भारतीय कलात्मक परंपरा नृत्य संगीत, गायन, वादन तथा कला के विविध आयामों पर सारगर्भित व्याख्या प्रस्तुत की। व्याख्यान के दौरान उन्होंने भारतीय संगीत की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय संगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं बल्कि साधना संवेदना और आत्मविकास का पथ है। उन्होंने यह भी कहा कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने से पहले व्यक्ति को स्वयं के भीतर परिवर्तन लाना आवश्यक है। अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. (डॉ.) लवली शर्मा ने कहा कि इन्दिरा कला संगीत विश्वविद्यालय का स्वरूप विशिष्ट है और यहां इस प्रकार के वैचारिक एवं सांस्कृतिक विमर्श विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि रामाशीष सिंह ने अपने व्याख्यान में विषय को अत्यंत सरल उदाहरणपूर्ण और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जिसे सभी ने गंभीरता से सुना और आत्मसात किया।उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान समय में भारतीय सांस्कृतिक चिंतन और वैचारिक परंपरा पर गंभीर संवाद की आवश्यकता और अधिक बढ़ गई है। हमारे देश का सांस्कृतिक इतिहास अत्यंत समृद्ध है और प्राचीन ग्रंथों वेदों तथा शास्त्रीय परंपराओं में निहित ज्ञान को शोध और अध्ययन के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है।कार्यक्रम का संचालन अतिथि व्याख्याता डॉ. परमानंद पाण्डेय ने किया जबकि आभार प्रदर्शन सहायक प्राध्यापक विवेक नवरे ने किया। इस अवसर पर अधिष्ठाता कला संकाय प्रो.राजन यादव, अधिष्ठाता संगीत संकाय प्रो.नमन दत्त, श्रुति मंडल संयोजिका डॉ.दीपशिखा पटेल, सदस्य डॉ.हरिओम हरि एवं डॉ.दिवाकर कश्यप सहित शिक्षकगण और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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