लमती नदी पर 242 करोड़ के निर्माणाधीन बांध का विरोध, विधायक संग कलेक्ट्रेट पहुंचकर ग्रामीणों ने लगाई हुंकार

सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। लमती नदी पर 242 करोड़ 77 लाख की लागत से प्रस्तावित बांध को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 13 अगस्त को इसका भूमिपूजन किया था लेकिन अब स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने इसका कड़ा विरोध शुरू कर दिया है।सोमवार को ग्राम लक्षनाटोला, बोरला, महुआढार, कटेमा और दल्लीखोली के सैकड़ों ग्रामीण खैरागढ़ कलेक्टर कार्यालय पहुंचे, उनके साथ डोंगरगढ़ विधायक हर्षिता स्वामी बघेल और सरपंच कमलेश वर्मा भी मौजूद रहीं। ग्रामीणों ने कलेक्टर इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल को ज्ञापन सौंपकर कहा कि बांध बनने से उनकी पुश्तैनी जमीन, मकान और आजीविका डूबान क्षेत्र में आ जाएगी। इससे न केवल उन्हें बेघर होना पड़ेगा बल्कि बच्चों की शिक्षा भी बाधित होगी। ग्रामीणों का आरोप है कि बिना जानकारी और सहमति के प्रशासन ने मुख्यमंत्री से भूमिपूजन करा दिया। इस पर विधायक हर्षिता स्वामी बघेल ने भी नाराज़गी जताते हुए कहा है कि ग्रामीणों की सहमति के बिना यह परियोजना कैसे शुरू हो सकती है? पहले भी प्रधानपाठ बैराज के समय लक्षना गांव डूबान क्षेत्र में आ गया था और शासन के करोड़ों रुपये खर्च कर ग्रामीणों को विस्थापित कर लक्षनाटोला गांव बसाया गया। अब यह नया बांध उसी गांव को फिर से डुबो देगा।

विधायक श्रीमती स्वामी और सरपंच सहित ग्रामीणों ने प्रशासन को सुझाव दिया कि यदि बांध बनाना ही है तो इसे भदरी खोल इलाके में शिफ्ट किया जाए जहां से ग्रामीणों को कोई नुकसान नहीं होगा। यह इलाका सुरक्षित और समतल क्षेत्र है जहां क्षेत्र के किसानों की बहुतायत में जमीन नहीं है और आवास भी नहीं है। इस दौरान कलेक्टर ने ग्रामीणों की बातों और मांग को गंभीरता से सुनते हुए जल संसाधन विभाग को पुनः सर्वे करने और सर्वे के दौरान ग्रामीणों को शामिल करने के निर्देश दिए। इससे पहले ग्रामीण जिला पंचायत उपाध्यक्ष विक्रांत सिंह से भी मिले और योजना में संशोधन कर सहयोग मांगा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल उनकी ज़मीन-जायदाद का सवाल नहीं है बल्कि अस्तित्व और भविष्य की सुरक्षा का भी प्रश्न है। प्रशासन की अगली कार्यवाही अब इस पूरे विवाद का रुख तय करेगी।

बांध के निर्माण को लेकर ग्रामीणों की सहमति नहीं ली गई है, यह सरासर ग्रामीण और किसानों के हितों को कुचलने वाला कदम है जिसका हम पुरजोर विरोध करेंगे और जरूरत पड़ी तो बड़ा आंदोलन भी करेंगे।

ग्रामीणों की मांग के अनुरूप गांव जाकर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को पुनः सर्वे के लिए कहा गया है, योजना क्षेत्र के ग्रामीणों के हित के लिए है, सहमति से ही निर्माण कार्य प्रारंभ कराया जाएगा।

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